आज देवशयनी एकादशी है। यह सभी एकादशी में महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है, क्योंकि इसी दिन से सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु योगनिद्रा में क्षीर सागर में चले जाते हैं और चार महीने के लिए चातुर्मास आरंभ हो जाते हैं। एकादशी और चातुर्मास के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए जिसका वर्णन शास्त्रों में किया गया है।
1- देवशयनी एकादशी पर चावल खाने से बचना चाहिए। इस कारण से एकादशी तिथि पर भोजन में चावल नहीं बनाना चाहिए। चावल में जल तत्व की मात्रा सबसे अधिक होती है। ऐसी मान्यता है जो भी एकादशी के दिन चावल का सेवन करता है वह अगले जन्म में रेंगने वाला प्राणी के रूप में पैदा होता है।
2- देवशयनी एकादशी पर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करनी चाहिए और पूजा के दौरान पीला रंग का वस्त्र धारण करना शुभ होता है। भूलकर भी कभी एकादशी पर काले कपड़े नहीं पहनना चाहिए।
3- एकादशी पर सादा और सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। इस तिथि पर कभी भी लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा और अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए।
4- हरिशयनी एकादशी पर बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं कटवाने चाहिए। इस तिथि पर ऐसा करना अशुभ माना गया है।
5- एकादशी तिथि पर मन को शांत रखना चाहिए और किसी दूसरे व्यक्ति को अपशब्द या अपमान नहीं करना चाहिए।
चातुर्मास के दौरान क्या करें और क्या नहीं?
देवशयनी एकादशी तिथि से चातुर्मास आरंभ हो जाते हैं। इन चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु जोकि सृष्टि के पालनकर्ता है, वह क्षीर सागर में योग निद्रा में रहते हैं। इस कारण से चार महीनों के दौरान किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं। चातुर्मास के दौरान व्यक्ति को क्या करना चाहिए और क्या नहीं,इसके बारे में शास्त्रों में बताया गया है।
1- चातुर्मास के दौरान यात्राएं नहीं करनी चाहिए।
2- चातुर्मास के दौरान मीठी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
3- इस दौरान दीर्घायु और संतान की प्राप्ति के लिए तेल का त्याग करना चाहिए।
4- चातुर्मास पर जमीन पर सोना चाहिए।
5- इन चार माह के दौरान मूली, परवल,शहद और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए।
6- किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा दिए गए दही और चावल को ग्रहण नहीं करना चाहिए।