फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Christmas 2018: संत निकोलस कैसे बने सैंटा क्लॉज

Mon, 24 Dec 2018 05:14 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
christmas
विज्ञापन

25 दिसंबर को पूरी दुनिया क्रिसमस का त्योहार मनाता है। यह पर्व ईसाई समुदाय जीसस क्राइस्ट के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्रिसमस के मौके पर सबसे ज्यादा क्रेज सैंटा क्लॉज का होता है, खासतौर पर बच्चे बेसब्री से सैंटा क्लॉज से उपहार पाने के लिए इंतजार करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं सैंटा क्लॉज क्यों बच्चों को उपहार देते हैं और कब से शुरू हुई परंपरा आइए जानते हैं।

विज्ञापन


- सैंटा क्लॉज के बारे में ऐसी मान्यता है कि सैंटा का घर उत्तरी ध्रुव पर स्थित है और वे उड़ने वाले रेनडियर की गाड़ी पर चलते हैं। हालांकि सैंटा का यह रूप 19वीं सदी से चलन में आया उसके पहले ऐसा नहीं था।

- संत निकोलस को असली सैंटा माना जाता है। संत निकोलस का जन्म प्रभु इशु की मौत के 280 साल बाद मायरा में हुआ था। संत निकोलस बचपन में ही अनाथ हो गए थे जिसके कारण उनकी प्रभु यीशु में गहरी आस्था थी।
विज्ञापन


- संत निकोलस बड़े होकर ईसाई धर्म के पादरी फिर बाद में बिशप बनें। उन्हें बच्चों और जरुरतमंद लोगों को उपहार देना बहुत अच्छा लगता था। 

- संत निकोलस जब भी किसी को उपहार देते थे तो हमेशा आधी रात को ही देते थे क्योंकि उपहार देते हुए नजर आना पसंद नहीं करते थे और वह अपनी पहचान किसी के सामने जाहिर करना नहीं चाहते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें