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Chhath Puja 2025: छठ पूजा पर इस चालीसा के पाठ से खुलेंगे भाग्य के द्वार, आएंगी खुशियां ही खुशियां

Sat, 25 Oct 2025 10:03 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Chhath Puja Upay: छठ महापर्व सूर्य देव और छठी माई की आराधना का पवित्र पर्व है, जो नियम, संयम और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि श्रद्धा से छठ व्रत करने पर सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और जीवन में सफलता मिलती है।
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सूर्य चालीसा का पाठ - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Chhathi Maiya Chalisa: छठ महापर्व हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और कठिन व्रत है, जिसे षष्ठी तिथि के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी माई की उपासना को समर्पित है। इस दौरान भक्त चार दिनों तक नियम, संयम और तपस्या का पालन करते हैं। व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इसके बाद  लोहंडा और खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ यह पर्व पूर्ण होता है। श्रद्धालु पूरे समर्पण के साथ उपवास रखते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।

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Chhath Puja History: कैसे हुई छठ पूजा की शुरुआत? जानें चार दिनों के इस महापर्व का महत्व
माना जाता है कि यह पर्व सबसे पहले बिहार और पूर्वांचल के क्षेत्रों में शुरू हुआ था, लेकिन आज इसकी भव्यता पूरे देश और विदेशों में भी देखने को मिलती है। अब छठ पूजा केवल एक क्षेत्रीय परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और भारतीय संस्कृति का प्रतीक बन चुकी है। इस वर्ष छठ पर्व का शुभारंभ 25 अक्तूबर से हो रहा है, जब भक्तगण पूरे मनोयोग से इस पावन व्रत की शुरुआत करेंगे।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा से छठ व्रत करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है तथा संतान की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति अपने करियर में सफलता पाना चाहता है या जीवन की बाधाओं से मुक्ति चाहता है, तो छठ पर्व के दौरान सूर्य चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और अधूरे कार्य पूरे होने लगते हैं।

।।सूर्य चालीसा का पाठ।।
॥ दोहा ॥

कनक बदन कुण्डल मकर,मुक्ता माला अङ्ग।
पद्मासन स्थित ध्याइए,शंख चक्र के सङ्ग॥

॥ चौपाई ॥
जय सविता जय जयति दिवाकर!।सहस्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!।सविता हंस! सुनूर विभाकर॥
विवस्वान! आदित्य! विकर्तन।मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
अम्बरमणि! खग! रवि कहलाते।वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥
सहस्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि।मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
अरुण सदृश सारथी मनोहर।हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥
मंडल की महिमा अति न्यारी।तेज रूप केरी बलिहारी॥
उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते।देखि पुरन्दर लज्जित होते॥
मित्र मरीचि भानु अरुण भास्कर।सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
पूषा रवि आदित्य नाम लै।हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥
द्वादस नाम प्रेम सों गावैं।मस्तक बारह बार नवावैं॥
चार पदारथ जन सो पावै।दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥
नमस्कार को चमत्कार यह।विधि हरिहर को कृपासार यह॥
सेवै भानु तुमहिं मन लाई।अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥

बारह नाम उच्चारन करते।सहस जनम के पातक टरते॥
उपाख्यान जो करते तवजन।रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥
धन सुत जुत परिवार बढ़तु है।प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
अर्क शीश को रक्षा करते।रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत।कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
भानु नासिका वासकरहुनित।भास्कर करत सदा मुखको हित॥
ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे।रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा।तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥
पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर।त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
युगल हाथ पर रक्षा कारन।भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥
बसत नाभि आदित्य मनोहर।कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
जंघा गोपति सविता बासा।गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥
विवस्वान पद की रखवारी।बाहर बसते नित तम हारी॥
सहस्रांशु सर्वांग सम्हारै।रक्षा कवच विचित्र विचारे॥
अस जोजन अपने मन माहीं।भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥
दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै।जोजन याको मन मंह जापै॥
अंधकार जग का जो हरता।नव प्रकाश से आनन्द भरता॥
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही।कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥
मंद सदृश सुत जग में जाके।धर्मराज सम अद्भुत बांके॥
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा।किया करत सुरमुनि नर सेवा॥
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों।दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥
परम धन्य सों नर तनधारी।हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन।मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥
भानु उदय बैसाख गिनावै।ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥
यम भादों आश्विन हिमरेता।कातिक होत दिवाकर नेता॥
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं।पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं॥
॥ दोहा ॥
भानु चालीसा प्रेम युत,गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहि बिबिध,होंहिं सदा कृतकृत्य॥

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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