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Chhath Puja 2024 Day 4: यहां जानें छठ पूजा के आखिरी दिन उषा अर्घ्य का मुहूर्त और महत्व

Fri, 08 Nov 2024 01:07 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chhath Puja 2024 Usha Arghya: आज यानी 08 नवंबर को छठ पूजा का आखिरी दिन है। चौथा दिन यानी सप्तमी तिथि छठ महापर्व का अंतिम दिन होता है। इस दिन प्रातः काल उगते सूर्य को जल दिया जाता है। इसी के साथ छठ पर्व का समापन होता है।
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छठ पूजा की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Chhath Puja 2024 Day 4: आज यानी 08 नवंबर को छठ पूजा का आखिरी दिन है। चौथा दिन यानी सप्तमी तिथि छठ महापर्व का अंतिम दिन होता है। इस दिन प्रातः काल उगते सूर्य को जल दिया जाता है। इसी के साथ छठ पर्व का समापन होता है। छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इसके बाद दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन को ऊषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। छठ का पर्व बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। छठ का व्रत संतान की लंबी उम्र और उनके खुशहाल जीवन के लिए रखा जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं आखिरी दिन सूर्योदय कब होगा और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की विधि क्या है। 
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उगते सूर्य को अर्घ्य देने का समय
08 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। द्रिक पंचांग के अनुसार उषा अर्घ्य समय आज यानी  08 नवंबर 2024 को प्रातः  06 बजकर 38 मिनट तक होगा। इसके बाद ही 36 घंटे का व्रत समाप्त हो जाएगा। अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण करती हैं। 

उषा अर्घ्य की विधि
  • सूर्य देव को अर्घ्य देते समय अपना चेहरा पूर्व दिशा की ओर ही रखें। 
  • अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के पात्र का ही प्रयोग करें। 
  • सूर्य देव को जल चढ़ाते  देते समय जल के पात्र को हमेशा दोनों हाथों से पकड़े। 
  • सूर्य को अर्घ्य देते समय पानी की धार पर पड़ रही किरणों को देखना बहुत ही शुभ माना जाता है। 
  • अर्घ्य देते समय पात्र में अक्षत और लाल रंग का फूल जरूर डालें। 
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उषा अर्घ्य का महत्व
चार दिवसीय छठ पूजा का समापन उषा अर्घ्य होता है। इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ के व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उदित होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद सूर्य देव और छठ माता से संतान के सुखी जीवन और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। 



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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