फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन इस विधि से करें कलश स्थापना, जानें इसके नियम और पूजा मुहूर्त

Wed, 18 Mar 2026 04:46 PM IST
Megha Kumari ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विधान है। मान्यता है कि, यदि नवरात्रि में कलश स्थापना सही विधि से की जाए, तो देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती हैं।
विज्ञापन
Chaitra Navratri 2026 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Chaitra Navratri 2026: हिंदू कैलेंड के अनुसार, वर्ष का पहला प्रमुख त्योहार चैत्र नवरात्रि होता है, जो शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रांरभ होता है। इस दिन हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा भी मनाया जाता है। इस बार 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जो मां दुर्गा की आराधना को समर्पित है। मान्यता है कि, इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। साथ ही भक्तों द्वारा श्रद्धा भाव के साथ नौ दिनों का उपवास किया जाता है। हालांकि, नवरात्रि का पहला दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस तिथि पर पूजा स्थान पर कलश स्थापना की जाती है। मान्यता है कि, कलश में सभी देवी-देवताओं का वास होता है और इसे रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, सुख-समृद्धि बढ़ती है। लेकिन क्या आप कलश स्थापना की सही विधि को जानते हैं। अगर नहीं, तो आइए जानते हैं।

विज्ञापन

Chaitra Amavasya 2026 Date: कब है चैत्र अमावस्या 18 या 19 मार्च, जानिए तिथि, महत्व और स्नान-दान मुहूर्त
Chaitra Navratri 2026: इन चीजों के बिना अधूरी है चैत्र नवरात्रि की पूजा, जानें इनके नाम और संपूर्ण सामग्रियां
विज्ञापन


कलश स्थापना शुभ मुहूर्त

  • चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। 
  • दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

विज्ञापन

Maa Durga Ke 9 Roop: मां दुर्गा के 9 स्वरूप और उनसे जुड़ी मान्यताएं, जानें नवरात्रि में उनकी पूजा का महत्व
कलश स्थापना विधि

  • कलश स्थापना के लिए आप एक मिट्टी का पात्र लें और उसमें साफ मिट्टी डालें।
  • इस दौरान पात्र को पूजा मिट्टी से भरें और उसे फैला लें। 
  • कुछ जौ के बीज लेकर उसे पात्र में डालकर मिलाएं।
  • इसके बाद पात्र पर साफ पानी से थोड़ा छिड़काव करें।
  • वहीं एक तांबे के लोटे में साफ जल भरकर उसपर मौली बांधें।
  • लोटे में सुपारी, पान का पत्ता, सिक्के, चावल और बताशें डाल दें।
  • इसके बाद 7 या 11 अशोक के पत्त लेकर उसे साफ करें।
  • सभी पत्तों को लोटे में डालकर एक गोला बना लें।
  • अब आप एक पानी वाले नारियल पर चुनरी और कलावा बांधकर उसे लोटे के ऊपर रखें।
  • इसपर रोली से तिलक लगाएं और कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित कर लें।
  • इसके बाद आप देवी का श्रगांर करें और धूप जलाएं।
  • दीपक जलाकर आरती करें और कुछ फल देवी को अर्पित करें।
  • अंत में दुर्गा सप्तशती और आरती का पाठ करते हुए सभी को प्रसाद बांट दें।



Chaitra Navratri 2026 Colors: नवरात्रि में किस दिन पहनें कौन सा रंग? यहां देखें नौ दिनों की पूरी लिस्ट

 




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें