फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chaitra Navratri Maa Skandamata Puja: नवरात्रि के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा का महत्व, विधि और मंत्र

Wed, 02 Apr 2025 06:06 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Chaitra Navratri Maa Skandamata Puja: पंचम दिन देवी स्कंदमाता की आराधना का विशेष महत्व होता है। यह देवी भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है।
विज्ञापन
देवी स्कंदमाता के मंत्र - फोटो : adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Chaitra Navratri Maa Skandamata Puja: आज चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है और मां के पांचवें स्वरूप देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक रूप की पूजा की जाती है। पंचम दिन देवी स्कंदमाता की आराधना का विशेष महत्व होता है। यह देवी भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इनकी कृपा से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी स्कंदमाता की उपासना करने से शत्रु बाधा दूर होती है और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है।
विज्ञापन


देवी स्कंदमाता का स्वरूप
देवी स्कंदमाता की चार भुजाएं होती हैं। ये एक हाथ में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में धारण किए रहती हैं, दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है और अन्य दो हाथों में आशीर्वाद मुद्रा और वर मुद्रा होती है। इनका वाहन सिंह है और ये कमल पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें 'पद्मासना' भी कहा जाता है। इनका स्वरूप सौम्य, शांतिपूर्ण और कल्याणकारी है।

देवी स्कंदमाता की पूजा का महत्व
देवी स्कंदमाता की पूजा करने से साधक को आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। इनकी कृपा से मोक्ष का मार्ग खुलता है और सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। यह देवी बुद्धि और ज्ञान का विकास करती हैं, जिससे व्यक्ति को सही निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त होती है।संतान सुख और रोगमुक्ति के लिए स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इनकी उपासना करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है।

Chaitra Navratri: आर्थिक समस्या दूर करने के लिए नवरात्रि में कर लें कमलगट्टे का ये चमत्कारी उपाय, होगा धनलाभ

पूजा विधि
विज्ञापन

मां के श्रृंगार के लिए खूबसूरत रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। स्कंदमाता और भगवान कार्तिकेय की पूजा विनम्रता के साथ करनी चाहिए। पूजा में कुमकुम,अक्षत,पुष्प,फल आदि से पूजा करें। चंदन लगाएं, माता के सामने घी का दीपक जलाएं। देवी के मंत्रों का जाप करें और उनकी आरती करें। माता को दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं और अंत में भक्तों में प्रसाद वितरण करें।

April 2025 Vrat Tyohar List: अप्रैल माह में कई व्रत-त्योहार, रामनवमी से लेकर अक्षय तृतीया कब? यहां देखें

देवी स्कंदमाता के प्रिय फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी स्कंदमाता को केला बहुत प्रिय है। पूजा के दौरान माता को केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है। यह फल अर्पित करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्त को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
विज्ञापन


देवी स्कंदमाता के मंत्र
ध्यान मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
बीज मंत्र
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः॥
स्तोत्र मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें