6 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि पर्व का शुभारम्भ हो रहा है। देवी आराधना का यह पर्व नवरात्रि साल में दो बार मनाई जाती है। पहला चैत्र और दूसरा शारदीय नवरात्रि। नौ दिनों तक शक्ति की उपासना देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों के रूप में की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना होती है फिर नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की विशेष पूजा और आराधना होती है। कलश स्थापना कर नवरात्रि पर समस्त देवीय शक्तियों का आह्रान कर उन्हें सक्रिय किया जाता है।
कलश स्थापना विधि
नवरात्रि पर कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना करते ही नवरात्रि का पवित्र पर्व शुरू हो जाता है। घटस्थापना करते समय मिट्टी में धान बोए जाते हैं। इसके बाद गंगाजल, चंदन, फूल, दूर्वा, अक्षत, सुपारी और सिक्के कलश में रखें। कलश स्थापना के लिए एक लकड़ी का पाटा लें और उस पर नया लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद नारियल और कलश पर मौली बांधे, रोली से कलश पर स्वास्तिक बनाएं। वहीं कलश में शुद्ध जल और गंगा जल रखें।
घटस्थापना शुभ मूहूर्त
6 अप्रैल सुबह- 7:30 से 9:00
दोपहर: 1:30 से 3:00
इस चैत्र नवरात्रि 2019 की खास बातें-
- इस बार चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी और नवमी एक साथ मनाई जाएंगी।
- 14 अप्रैल को राम नवमी पर इस बार पुष्य नक्षत्र योग का संयोग बन रहा है। भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था।
- चैत्र नवरात्रि अष्टमी के दिन ही सुबह 8 बजकर 19 मिनट को नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन सुबह 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगी।
- भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में दोपहर को हुआ था इसलिए राम नवमी अष्टमी के दिन मनाना शुभ रहेगा।
- चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर 2076 शुरू होगा।
- इस बार चैत्र नवरात्रि रेवती नक्षत्र के साथ शुरू हो रही है।
- 9 दिनों के इस चैत्र नवरात्रि में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि और दो बार रवियोग आएगा। जो ज्योतिष दृष्टि से बहुत ही शुभ माना गया है।
नवरात्रि के 9 दिनों में कलश स्थापना और अखंड ज्योति के साथ देवी दुर्गा की करवाएं विशेष पूजा।