हिंदू धर्म में बहुला चौथ का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। बहुला चतुर्थी पर माताएं अपने संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रहती हैं। इस पर्व में भगवान गणेश के साथ भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा करने का विशेष विधान होता है। आइए जानते हैं कब है बहुला चतुर्थी, पूजा का मुहूर्त और महत्व समेत सभी जानकारियां।
बहुला चतुर्थी 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर होगा, जिसका समापन 01 सितंबर को सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर होगा। ऐसे में यह पर्व 31 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रदेव की विशेष पूजा करने का विधान होता है।
बहुला चतुर्थी शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय
बहुला चौथ पर भगवान गणेश और भगवान कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन वर्ती महिलाएं शाम के समय चंद्र दर्शन और अर्ध्य देने के बात व्रत का पारण करेगी। पंचांग अनुसार बहुला चतुर्थी की शाम को चंद्रोदय का समय रात 08 बजकर 28 मिनट पर होगा। जिसमें व्रती चंद्र दर्शन और अर्घ्य देकर व्रत को पूरा करेंगी।
पूजा शुभ मुहूर्त
अमृत चौघड़िया- सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक
शुभ चौघड़िया- सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक
लाभ चौघड़िया- दोपहर में 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक
अमृत चौघड़िया- शाम को 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक
चंद्रोदय का समय- रात में 8 बजकर 29 मिनट पर
बहुला चतुर्थी पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है और भाद्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर भगवान गणेश के साथ-साथ भगवान कृष्ण की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार , इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान के साथ पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और संतान के सुखों में वृद्धि और बाधाएं दूर होती हैं। बहुला चतुर्थी के दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत के लिए पूरे दिन व्रत रहते हुए सुखी जीवन की कामना करती हैं।
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