2 जून, मंगलवार को ज्येष्ठ महीने का आखिरी मंगलवार है। इसे बड़ा मंगल भी कहते हैं। मान्यता है ज्येष्ठ माह में जितने भी मंगल आते हैं उस दिन हनुमान जी की विशेष रूप से पूजा-पाठ होती है। भगवान हनुमान की पूजा और कृपा पाने के लिए ज्येष्ठ माह के मंगलवार काफी महत्व रखता है। मान्यता है कि हनुमान जी की ज्येष्ठ माह में पहली बार प्रभु भगवान श्रीराम से मुलाकात हुई थी। बड़ा मंगल पर हनुमानजी की मंदिरों में विशेष पूजा-आराधना की जाती है। बड़ा मंगल का त्योहार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विशेषरूप से बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
पूजा विधि
मान्यता है कि मंगलवार की शाम को जो विधिवत रूप से हनुमानजी की पूजा करने से सभी तरह के शुभ फल की प्राप्त होती है। इस दिन मंदिर जाकर हनुमानजी को बूंदी के लड्डू प्रसाद के रूप में जरूर अर्पित करना चाहिए। फिर हनुमान जी की मूर्ति के सामने बैठकर हनुमान चालीसा या बजरंग बाण पाठ जरूर करें।
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हनुमानजी की पूजा के नियम
- हनुमानजी की पूजा करते समय ब्रह्राचर्य का पूरा पालन करें। भूलकर भी हनुमान जी की उपासना करते समय किसी भी प्रकार की कामुक चर्चा नहीं करनी चाहिए। -
- हनुमानजी की उपासना में लाल रंग के फूल, शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का प्रयोग करना चाहिए।
- हनुमानजी की मूर्ति को घर में ऐसे रखना चाहिए कि उनकी दृष्टि दक्षिण दिशा की तरफ हो।
- हनुमानजी की पूजा से पहले उनके आराध्य प्रभु श्री राम का अवश्य ध्यान करें। उनके मंत्र का जाप करें।
- हनुमान जी की पूजा में तुलसीदल जरूर अर्पित करना चाहिए।
बड़ा मंगल क्यों कहते हैं
मान्यता है कि हनुमान जी पहली बार अपने आराध्य प्रभु श्रीराम से ज्येष्ठ माह के मंगलवार वाले दिन मिले थे। यही कारण है कि इसे बड़ा मंगल कहा जाता है। इसलिए पूरे ज्येष्ठ माह में श्री हनुमान जी से जुड़े इस अहम दिन विशेष रूप से साधना-आराधना की जाती है।
बड़ा मंगल से जुड़ी कथा
लखनऊ के हनुमान मंदिर में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही भक्ति भाव से इस महापर्व से जुड़ते हैं। लखनऊ में बड़ा मंगल मनाने के पीछे मान्यता है कि एक समय यहां के नवाब सआदतअली खां बहुत बीमार पड़ गए, जिसके बाद उन्होंने स्वस्थ होने के लिए उन्होंने हनुमान से मन्नत मांगी थी, जिसके पूरे होते ही उन्होंने हनुमान जी का एक विशाल मंदिर बनवाया था, जो आज अलीगंज में स्थित है।