Ashadh Purnima 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। यह तिथि बहुत पवित्र और पुण्यदायी मानी जाती है। आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा और वेद व्यास पूर्णिमा के नाम से भी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, चंद्रमा और महर्षि वेदव्यास की विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है। आषाढ़ पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य, जप-तप और गुरु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कब है आषाढ़ पूर्णिमा, शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में विस्तार से।
आषाढ़ पूर्णिमा तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई को शाम 6 बजकर 19 मिनट पर होगी और 29 जुलाई 2026 को रात 8 बजकर 5 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि के आधार पर आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी।
आषाढ़ पूर्णिमा पर दान और स्नान का शुभ मुहूर्त
आषाढ़ पूर्णिमा पर ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 04 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 04 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 43 मिनटे से दोपहर 03 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। संध्यकाल मुहूर्त शाम 07 बजकर 14 मिनट स लेकर रात 08 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
आषाढ़ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में हर महीने पूर्णिमा और अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महर्षि वेदव्यास का प्राकट्य हुआ था। महर्षि वेद व्यास वेदों का विभाजन और महाभारत और पुराणों की रचना की थी। इन्हे प्रथम गुरु का दर्जा भी मिला है। ऐसे में इस दिन गुरुओं की पूजा, सम्मान और उनका आशीर्वाद लेना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण की कथा सुनना और चंद्रमा को अर्घ्य देना बहुत ही शुभ और अच्छा माना जाता है। इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व होता है।
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