सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व माना गया है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है। जो कभी नष्ट न हो। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल अक्षय रहता है, वहीं इस दिन किए गए पापों का फल भी अक्षुण्ण रहता है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार इस दिन मनुष्य को विशेष सावधानी, संयम और नियम का पालन करना चाहिए।
अक्षय तृतीया के दिन क्या करें
1. भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा
इस दिन प्रातः स्नान कर शांत मन से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इससे जीवन में सुख-समृद्धि और धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
2. जप-तप और अनुष्ठान
पूजा-पाठ, जप-तप और सकाम अनुष्ठान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।
3. दान-पुण्य का महत्व
अन्न, जल, वस्त्र और फल का दान इस दिन विशेष फलदायी होता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है।
4. शुभ कार्यों की शुरुआत
अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ या संपत्ति खरीदने जैसे कार्य बिना पंचांग देखे भी किए जा सकते हैं।
5. सोने की खरीदारी
धर्म ग्रंथों के अनुसार स्वर्ण में महालक्ष्मी का वास माना गया है। इसलिए इस दिन सोना खरीदना अत्यंत शुभ होता है और इससे घर में धन-समृद्धि का आगमन होता है।
6. क्षमा प्रार्थना करना
इस दिन सच्चे मन से भगवान से अपने और अपने स्वजनों द्वारा किए गए ज्ञात-अज्ञात अपराधों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। इससे ईश्वर प्रसन्न होकर व्यक्ति को सद्गुण प्रदान करते हैं।
7. सद्गुणों का संकल्प
अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में अर्पित कर सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लें। यह दिन आत्मशुद्धि का उत्तम अवसर माना गया है।
8. वृक्षारोपण करना
पीपल, आम, बरगद, आंवला और बेल जैसे वृक्ष लगाने से जीवन में उन्नति और सुख प्राप्त होता है। जैसे ये वृक्ष पल्लवित होते हैं, वैसे ही व्यक्ति का जीवन भी प्रगति करता है।
9. व्रत का पालन
विवाह योग्य कन्याएं उत्तम वर की प्राप्ति के लिए और संतान की इच्छा रखने वाली स्त्रियां इस व्रत को करें। इस व्रत में नमक का त्याग विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है।
अक्षय तृतीया के दिन क्या ना करें
1. अनाचार और दुराचार से दूर रहें
इस दिन किसी भी प्रकार का गलत आचरण नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस दिन किए गए पापों का फल भी अक्षय होता है।
2. छल-कपट और धूर्तता न करें
किसी के साथ धोखा या बेईमानी करने से बचें। यह नकारात्मक कर्म लंबे समय तक प्रभाव डालते हैं।
3. किसी का अपमान न करें
किसी को कष्ट देना या अपमानित करना इस दिन विशेष रूप से वर्जित माना गया है।
4. झूठ और गलत कार्यों से बचें
झूठ बोलना और अनुचित कार्य करना इस दिन अशुभ फल देने वाला माना गया है।
5. क्रोध और अहंकार से दूर रहें
क्रोध, लोभ और अहंकार जैसी भावनाएं व्यक्ति के पुण्य को नष्ट कर सकती हैं, इसलिए इनसे बचना चाहिए।
6. नमक का सेवन न करें (व्रतीजन)
जो लोग व्रत रखते हैं, उन्हें इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में नमक त्याग का विशेष महत्व बताया गया है।
7. लापरवाही न करें
किसी भी शुभ कार्य में असावधानी या लापरवाही से बचना चाहिए, क्योंकि यह दिन अत्यंत पवित्र माना गया है।
8. ईर्ष्या और द्वेष से दूर रहें
दूसरों के प्रति नकारात्मक भाव रखना इस दिन अशुभ माना गया है, इसलिए मन को शुद्ध और सकारात्मक रखें।