सभी तरह के शुभ मुहूर्त में अक्षय तृतीया का मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि को अक्षय तृतीया इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन किया गया शुभ कार्य और दान का कभी भी क्षय नहीं होता। अक्षय तृतीया पर विवाह, गृह प्रवेश और सभी तरह के मांगलिक कार्य आरंभ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। हालांकि दुनिया इस समय कोरोना महामारी के चपेट में है और इस पर विजय प्राप्त करने के लिए सभी जगह लॉकडाउन है ऐसे में अक्षय तृतीया का त्योहार फीका रहेगा। फिर भी घर पर रहते हुए अक्षय तृतीया के शुभ मौके पर हम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को ध्यान कर सुख-समृद्धि का कामना कर सकते हैं।
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अक्षय तृतीया का महत्व
जो भी इस शुभ तिथि पर दान और मांगलिक कार्य सपंन्न करता है उसे कभी क्षय न होने वाला पुण्य लाभ के फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया दान, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए सबसे शुभ तिथि मानी गई है। अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन सूर्य और चंद्रमा उच्च राशि में रहते है जिस वजह से इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु के अवतार परशुराम भगवान और हयग्रीव अवतरित हुए थे। सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया की शुभ तिथि के दिन से ही हुई थी। इसके अलावा मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थी।
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अक्षय तृतीया पर दान का महत्व
अक्षय तृतीया दान और पुण्य कमाने के लिए सबसे शुभ तिथि मानी गई है। मान्यता है कि इस तिथि पर दान करने से फल कभी नष्ट नहीं होता। इस दिन गंगा स्नान, पितरों को तर्पण और गरीबों को भोजन करवाने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में अक्षय तृतीया पर 14 तरह के दान का महत्व बताया गया है।
अक्षय तृतीया से जुड़ी बातें
- सभी शुभ तिथियों में अक्षय तृतीया का महत्व बहुत है। इस तिथि पर हर तरह के शुभ कार्य किया जा सकता है।
- अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदना और जमीन-जायदाद के सौदे करना शुभ माना जाता है।
- इस अबूझ तिथि पर भगवान विष्णु की विशेष आराधना होती है।
- पितरों का तर्पण और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है।
- अक्षय तृतीया के दिन सतयुग और त्रेता युग का आरंभ हुआ था।
- मुहूर्त शास्त्र के अनुसार साल में साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त होते हैं, जिसमें अक्षय तृतीया का विशेष स्थान होता है।
- अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी और हयग्रीव का जन्म हुआ था।
- बद्रीनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया के ही दिन खुलते हैं।