अक्षय तृतीया को बहुत ही शुभ तिथि मानी गई है। अक्षय तृतीया को आखा तीज भी कहते हैं। अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त है। अबूझ मुहूर्त का मतलब, इसमें किसी भी तरह के शुभ कार्य को करने के लिए मुहूर्त नहीं देखा जाता है। अक्षय तृतीया का त्योहार हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। अक्षय तृतीया पर सबसे अधिक शुभ कार्य सपंन्न किए जाते हैं। आइए जानते हैं अक्षय तृतीया के महत्व से जुड़ी कुछ खास बातें....
अक्षय तृतीया पर देवी विंध्यवासिनी के श्रृंगार से जीवन की समस्याएं होंगी दूर, मिलेगा धन लाभ का आशीर्वाद : 26-अप्रैल-2020
1- अक्षय तृतीया के दिन सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था इस कारण से अक्षय तृतीया का महत्व ज्यादा माना जाता है।
2- मुहूर्त शास्त्र के अनुसार साल में साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त होते हैं, जिसमें अक्षय तृतीया का विशेष स्थान होता है।
3- अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था।
4- बद्रीनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया के ही दिन खुलते हैं।
5- अक्षय तृतीया के दिन मां गंगा का अवतरण हुआ था।
6- अक्षय तृतीया का दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है। इस दिन किसी भी तरह का शुभ कार्य बिना मुहूर्त के संपन्न किया जा सकता है। विवाह, खरीदारी, गृह प्रवेश, नया व्यापार, भूमि पूजन आदि तरह के मांगलिक कार्य किए जा सकते है।
7- अक्षय तृतीया पर सोने के खरीददारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य का क्षय नहीं होता। इस लिए इसे अक्षय कहा जाता है।
8- अक्षय तृतीया के दिन वेद व्यास ने महाभारत लिखना आरंभ किया था। अक्षय तृतीया के ही दिन 18 दिनों तक चलने वाले महाभारत की लड़ाई का अंत हुआ था।
9- अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस पूजा से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है।
10- अक्षय तृतीया पर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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अक्षय तृतीया पर क्या करें
- अक्षय तृतीया पर सोने के आभूषण खरीदने को शुभ माना गया है। इसके अलावा अक्षय तृतीया पर लक्ष्मी नारायण की पूजा सफेद कमल या सफेद गुलाब से करने पर विशेष लाभ मिलता है।
- अक्षय तृतीया के दिन 11 कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर पूजा स्थल पर रखें।
- अक्षय तृतीया के दिन तुलसी जी की पूजा जरूर करें। तुलसी की धूपदीप से पूजन करने पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है।
- अक्षय तृतीया के दिन सत्तू का दान और सेवन दोनों ही शुभ माना जाता है।
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