01 नवंबर को अहोई अष्टमी है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी आयु, सुखी जीवन और सफलता के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन शाम को अहोई माता की पूजा होती है, फिर व्रत रखते हुए शाम के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। ऐसे में अगर आप भी पहली बार अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली है तो आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़े नियमों के बारे में...
अहोई अष्टमी पर क्या करें
व्रत का संकल्प लें
अहोई अष्टमी पर माताएं सबसे पहले सुबह जल्दी उठें और साफ-सुथरे कपड़े पहनकर संतान की लंबी आयु और मंगलकामना के लिए अहोई माता का व्रत संकल्प लें।
अहोई माता की प्रतिमा स्थापित करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई अष्टमी पर दीवार पर अहोई माता, उनके सात संतान और साही के चित्र लगाएं। फिर पूजा सामग्री को तैयार करें।
फलाहार रखें
अहोई अष्टमी पर फलाहार रखते हुए व्रत के नियमों का पालन करें। इस दिन कई माताएं निर्जला व्रत भी रखती हैं।
तारे की छांव में पूजन करें
सूर्यास्त के बाद अहोई माता की पूजा करने का विधान होत है। ऐसे में जब शाम को आकाश में तारे दिखाई देने लगे तो तारों की छांव में अहोई माता की पूजा करें और संतान की मंगलकामना के लिए व्रत रखें।
व्रत कथा और आरती करें
शाम को अहोई माती का पूजा करने के बाद व्रत कथा सुने और आरती करते हुए व्रत का माता से संतान की लंबी आयु और सफल जीवन की मंगलकामना करें।
संतान को आशीर्वाद दें
जब सभी पूजा विधि और व्रत खत्म हो जाए तो अपने बच्चों को मिठाई खिलाकर आशीर्वाद दें।
क्या ना करें
- इस दिन सुई-धागा, कैंची या कोई भी नुकीली वस्तु उपयोग में नहीं लानी चाहिए।
- अहोई अष्टमी के दिन क्रोध, विवाद या कटु शब्द बोलने से बचें।
- इस दिन किसी जीव-जंतु या जानवार को परेशान ना करें और जमीन की खुदाई भी नहीं करनी चाहिए।