Safla Ekadashi Vrat 2019
श्री हरि के कृपा से सफल होगी साधना
सफला एकादशी व्रत के पूजनीय देवता श्रीहरि हैं। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति विधि-विधान से भगवान विष्णु की साधना करते हुए एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करता है, उसे वर्षों की तपस्या का पुण्य प्राप्त होता है। पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजन करने वाले साधक के व्रत से प्रसन्न होकर देवाधिदेव भगवान विष्णु उसकी सभी मनोकामना पूर्ण करते हैं। उसके दु:खों को दूर करते हुए उसे प्रत्येक क्षेत्र में सफलता दिलाते हैं। भगवान विष्णु की कृपा पाकर साधक सभी सुखों को भोगता हुआ मोक्ष प्राप्त करता है।
Safla Ekadashi Vrat 2019
सफला एकादशी की कथा
पद्म पुराण की कथा के अनुसार महिष्मान नाम का एक राजा था। जिसका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में अक्सर लिप्त रहता था। इससे क्रोधित होकर राजा महिष्मान ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। इसके पश्चात्लु लुम्पक जंगल में रहने लगा।
एक बार लुम्पक पौष कृष्ण दशमी की रात में अत्यधिक ठंड के कारण वह सो न सका और सुबह होते होते ठंड के चलते बेहोश हो गया। आधा दिन बीतने के पश्चात् जब उसकी बेहोशी दूर हुई, तब वह जंगल से फल इकट्ठा करने लगा। सूर्यास्त के बाद वह अपनी किस्मत को कोसते हुए भगवान को याद करने लगा। एकादशी की रात भी अपने दुःखों पर विचार करते हुए लुम्पक सो न सका।
इस तरह अनजाने में ही लुम्पक से सफला एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक सुधर गया और उसके पिता महिष्मान ने उसे अपना सारा राज्य सौंप दिया और खुद तपस्या के लिए चले गये। धर्मपथ पर चलते हुए लुंपक ने कई वर्षों तक शासन किया और उसके पश्चात् वह भी तपस्या करने चला गया और मृत्यु के पश्चात उसे विष्णुलोक में स्थान प्राप्त हुआ।
Safla Ekadashi Vrat 2019
यदि व्रत करने में असमर्थ हैं तो...
यदि आप किसी बीमारी या किसी अन्य कारणवश व्रत को करने में असमर्थ हैं तो आप इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा अवश्य करें। दैनिक कार्य करते हुए श्रीहरि का स्मरण करें। साथ ही एकादशी वाले दिन चावल से बना भोजन, लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि तामसिक चीजों का सेवन न करें।