मेरा कहना है कि सबसे पहले अपना आज सही बनाओ, तब औरों को प्रेरणा दो...इसीलिए मैं अपनी शादी रुकवाई हूं... मैं कुछ करना चाहती हूं। यह कहना है इकौना ब्लॉक के चेचेदी गांव की रहने वाली और 83 फीसदी नंबरों से हाई स्कूल पास करके 11वीं में पढ़ रही गीता का।
बड़ी बहन की शादी 13 साल में हुई और गीता की शादी 12 में ही करने की तैयारी थी माता-पिता की। गीता के समझाने पर तो नहीं माने लेकिन जब बड़े भाई ने जिद के साथ बात की तो माता-पिता मान गए। पुलिस सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ करने का सपना संजोए गीता विश्वास के साथ आज कहती है कि उसके माता-पिता भी अब उसपर गर्व करते हैं। उसके भाई ने गीता को बाल विवाह से तो बचाया ही, हमेशा उसे आगे बढ़ने में हर तरह से मदद की। गीता कहती है कि अगर लड़कियां ठीक से शिक्षित होंगीं तो मायके और ससुराल, दोनों घरों में आशा की किरण फैलाएंगी।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने स्मार्टफोन फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं। गांवों में हो रहे बड़े बदलाव की यह छोटी-छोटी कहानियां हैं।