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मैं निरक्षर रहा लेकिन बच्चे काबिल बनकर ही शादी करेंगे

Wed, 24 Oct 2018 08:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Khun khun
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“गांव वाले बीच रस्ता रोक कर मुझे टोकते थे कि लड़की 15 साल की हो गई, तुमने अभी तक उसकी शादी क्यों नहीं की? मेरा यही जवाब रहता था कि हम अनपढ़ हैं और पढ़ाई की कीमत जानते हैं। कोई पत्र आ जाय तो हम एक अक्षर नहीं पढ़ सकते। कम से कम हमारे बच्चे तो काबिल बनें।”

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इन शब्दों में साइकिल मरम्मत की दुकान चलाने वाले खुनखुन बड़ी दमदारी से बाल विवाह के खिलाफ अपनी सोच को जाहिर करते हैं। टीटहरिया गांव के खुनखुन का दिमाग अपनी दो बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई को लेकर एकदम साफ है। दोनों पति-पत्नी के पूरी तरह से अनपढ़ रह जाने ने उन्हें जो सीख दी है, उसके चलते वे अपने समाज के हर दबाव का सामना करते हुए अपने तीनों बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वर्ना तो उनके गांव के हाल तो यह हैं कि वहां 13-15 साल की उम्र में की गई शादी ठीक मानी जाती है और 18 साल में की गई लड़की की शादी गलत।

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खुनखुन की बेटियां जब पढ़ाई पूरी कर लेंगी, अपने पैरों पर खड़ी हो जायेंगी, तब ही यह समझदार पिता उनकी शादी की बात करेगा। ऐसे समझदार पिता हर गांव की हर लड़की को मिलें तो गांवों की तकदीर संवरते देर न लगेगी।
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अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा  अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

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