इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राहुल गांधी के नागरिकता विवाद मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दी। अदालत ने 6 अप्रैल तक संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका में पूर्व आदेश को चुनौती देते हुए जांच की मांग की गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राहुल गांधी के नागरिकता विवाद से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को गृह मंत्रालय के माध्यम से पक्षकार बनाने की याचिका मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने केंद्र को 6 अप्रैल को संबंधित रिकॉर्ड पुनः प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई भी इसी तिथि पर होगी।
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याची एस. विग्नेश शिशिर को केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दी गई। इससे पहले 19 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने गोपनीय दस्तावेजों का हवाला देते हुए खुली अदालत में सुनवाई न करने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और चैंबर में सुनवाई की गई।
उस समय गृह मंत्रालय के अधिकारी रिकॉर्ड लेकर उपस्थित हुए थे, जिनका अवलोकन कर अदालत ने दस्तावेज वापस कर दिए थे। यह याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता शिशिर ने दायर की है। उन्होंने लखनऊ की एमपी/एमएलए अदालत के 28 जनवरी 2026 के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की उनकी मांग खारिज कर दी गई थी। याची ने पासपोर्ट अधिनियम व अन्य कानूनों के तहत जांच की मांग की है।