श्रीमद्भागवत गीता सार को हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में नौवीं से 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। गुरुवार को विधानसभा सदन में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि इन कक्षाओं के हिंदी और संस्कृत विषय में गीता सार के कुछ पाठ शामिल किए जाएंगे। तीसरी कक्षा से संस्कृत विषय की पढ़ाई करवाई जाएगी। भाजपा विधायकों जीतराम कटवाल और नरेंद्र ठाकुर की ओर से रखे गए संकल्प प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री ने यह जानकारी दी। कांग्रेस विधायकों ने भी ध्वनिमत से भाजपा विधायकों के संकल्प प्रस्ताव का समर्थन किया।
सदन में गुरुवार दोपहर बाद भोजन अवकाश के बाद विधायक जीतराम कटवाल और नरेंद्र ठाकुर ने श्रीमद्भागवत गीता को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का संकल्प प्रस्ताव रखा। कटवाल ने कहा कि जीवन का सार गीता में आता है। कई देशों में इसका अध्ययन करवाया जा रहा है। विधायक नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि आज के युवाओं और आने वाली पीढ़ी को संस्कारों और संस्कृति का ज्ञान देना जरूरी हो गया है। बच्चे मोबाइल फोन और टीवी में उलझ कर रह गए हैं। अब स्कूल ही ऐसा विकल्प रह गया है, जहां यह ज्ञान दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान धर्म परिवर्तन की शिक्षा नहीं देता है।
दूसरों को ज्ञान देने से पहले हमें खुद भी करना चाहिए गीता सार का अनुसरण
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि गीता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के साथ सदन के सदस्यों को भी पढ़ना चाहिए और इसे कंठस्थ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र, रामचरितमानस और शिव पुराण को भी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए। प्रदेश में सभी लोग भगवान को मानने वाले हैं। हम प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। विधायक आशा कुमारी ने कहा कि दूसरों को ज्ञान देने से पहले हमें खुद भी गीता सार का अनुसरण करना चाहिए।
प्रदेश के 42 सरकारी स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं
प्रदेश में 42 सरकारी स्कूल ऐसे भी हैं, जहां एक भी विद्यार्थी का दाखिला नहीं हुआ है। विधायक रमेश धवाला के सवाल में शिक्षा मंत्री की ओर से दिए गए लिखित जवाब में यह जानकारी दी गई। शिक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से 27 प्राथमिक पाठशालाएं ऐसी हैं जहां पर एक भी छात्र नहीं है। लाहौल-स्पीति जिले में सबसे ज्यादा सात स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी विद्यार्थी नहीं है। किन्नौर जिले में छह, कांगड़ा चार, हमीरपुर पांच और बिलासपुर जिले में तीन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य है। हमीरपुर के दो और लाहौल स्पीति के एक राजकीय पाठशाला में भी एक भी विद्यार्थी नहीं है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में 12 स्कूल भवन ऐसे भी हैं जो अभी तक उपयोग में नहीं लाए गए हैं। विधायक हीरालाल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग में 6200 पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। विधायक पवन काजल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि जिला कांगड़ा में अपर्याप्त रिक्त पद होने के कारण भाषा अध्यापक के पदों पर अभ्यर्थियों को नियुक्तियां प्रदान नहीं की गई हैं।
नवंबर, 2025 तक पूरा होगा धौलासिद्ध प्रोजेक्ट
ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने कहा कि नवंबर, 2025 तक धौलासिद्ध प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर अनुमानित 687.97 करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। ऊर्जा मंत्री ने यह जानकारी विधायक नरेंद्र ठाकुर के प्रश्न के उत्तर में दी।