हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में खतरनाक पेड़ों को कटवाने की आड़ में कुछ लोग अपने निजी फायदे के लिए भी खेल रच रहे हैं। कोई पेड़ को खतरनाक बताकर अपना प्लॉट खाली करना चाहता है तो कई ऐसे हैं जो घर की धूप न रुके, इसके लिए पेड़ों को खतरनाक बता रहे हैं। एमसी के प्रशासक एवं उपायुक्त आदित्य नेगी की अगुवाई वाली ट्री अथॉरिटी कमेटी के निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ है। कमेटी ने अभी तक पांच से ज्यादा वार्डों में खतरनाक पेड़ों का निरीक्षण कर लिया है। इस दौरान इन वार्डों से मिले ऐसे ही कई आवेदन रद्द कर दिए हैं।
कमेटी ने अपना पहला निरीक्षण भराड़ी, रुल्दूभट्ठा क्षेत्र में किया था जबकि दूसरा निरीक्षण छोटा शिमला, कसुम्पटी एरिया में किया गया। पहले निरीक्षण में कुल 19 पेड़ों को काटने के लिए आवेदन मिले थे जिनमें से आठ गलत पाए गए। इन्हें रद्द कर दिया है। वहीं, दूसरे चरण में दस पेड़ों का निरीक्षण किया गया। इनमें भी पांच आवेदन सही नहीं पाए गए। वन विभाग के अनुसार मौके पर पेड़ सही हालत में मिले हैं। लेकिन लोग इन्हें खतरनाक बताकर कटवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। कई पेड़ तो ऐसे हैं जिन्हें कटवाने के लिए दो से तीन बार आवेदन आ चुके हैं। कई जगह ऐसे पेड़ भी मिले हैं जिनकी जड़ें खोखली की जा चुकी हैं। अब इन्हें खतरनाक बताकर कटवाने की मांग की जा रही है।
खतरनाक पेड़ काटने को ही मंजूरी
निरीक्षण के दौरान सिर्फ उन्हीं पेड़ों को काटने की मंजूरी दी जाएगी जो खतरनाक होंगे। इसमें जो पेड़ सही हालत में हैं, उन्हें काटने की मंजूरी नहीं मिलेगी।
-अनीता भारद्वाज, डीएफओ शिमला शहरी