जुन्गा (शिमला)। निदेशालय फॉरेंसिक सेवाएं, हिमाचल प्रदेश, जुन्गा में विभिन्न विशेषज्ञताओं के 17 नवनियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक माह का इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को साक्ष्य एकत्र करने की तकनीकों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर निदेशक फॉरेंसिक सेवाएं डॉ. मीनाक्षी महाजन ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। प्रशिक्षण के दौरान अभियोजन निदेशक राजीव कटोच ने नए आपराधिक कानूनों, न्यायालयों में फॉरेंसिक रिपोर्टों की स्वीकार्यता और विशेषज्ञ गवाही से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, चंडीगढ़ की डॉ. सुखविंदर कौर ने विस्फोटों और विस्फोटकों, जबकि डॉ. राजीव जैन ने निष्कर्षण तकनीकों पर व्याख्यान दिया। सेवानिवृत्त नियंत्रक अजय उपाध्याय ने सेवा नियमों की जानकारी दी। वहीं, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की डॉ. सीमा कश्यप ने कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित पॉश अधिनियम, 2013 के प्रावधानों से अवगत करवाया। संवाद