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Himachal: उत्तराखंड से बरात लेकर पहुंची दुल्हन, पुरातन परंपरा के साथ रचाई शादी

Sun, 29 Jan 2023 11:35 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिलाई (सिरमौर)

सार

झाजड़ा परंपरा में दूल्हा बरात लेकर दुल्हन के घर नहीं जाता। दूल्हे के गांव का एक व्यक्ति दुल्हन के घर जाता है और वहां से दुल्हन गांव के सभी लोगों के साथ उस व्यक्ति के साथ दूल्हे के घर पहुंचती है।
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तीन दुल्हनें पहुंचीं बरात लेकर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के शिलाई उपमंडल में पुरातन रीति-रिवाज से एक परिवार के तीन सगे भाइयों की शादियां हुईं। यहां बरात लेकर दूल्हा दुल्हन के घर नहीं गया, बल्कि उत्तराखंड से एक दुल्हन बरात लेकर ससुराल पहुंचीं और पूरी रस्मों व रीति-रिवाज के साथ शादी के बंधन में बंध गईं। इस अद्भुत नजारे के सैकड़ों लोग गवाह बने। यह शादी समारोह शिलाई उपमंडल की बालीकोटी पंचायत के कुसेनू गांव में हुआ।  उत्तराखंड की चकराता तहसील के जगनाथ गांव से दुल्हन सुमन जोशी का विवाह सबसे बड़े भाई राजेंद्र के साथ हुआ। सुमन बरात लेकर पहुंची थीं। शिलाई की बांबल पंचायत की नीलम की शादी देवेंद्र और शिरीक्यारी पंचायत के वापिल गांव की कमलेश का विवाह सबसे छोटे भाई कुलदीप के साथ हुआ।

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खास बात यह रही कि उत्तराखंड से बरात लेकर आईं सुमन के परिवार के साथ दहेज को लेकर कोई लेन-देन नहीं हुआ। उत्तराखंड की दुल्हन सिर्फ अपने घर से लोटा, बंटा और परात लेकर आईं। न ही शराब परोसी गई। उत्तराखंड का चकराता जनजातीय क्षेत्र है। शिलाई और उत्तराखंड के जौनसार बाबर में इस तरह की परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। दूल्हे के पिता कुंभराम ने बताया कि शादी समारोह में नशे पर पूरी तरह पाबंदी रही। वहीं, केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री ने बताया कि यह जनजातीय क्षेत्र की परंपरा है। इसका जिक्र हाटी समुदाय की एथनोग्राफिक रिपोर्ट में भी है।

गिरिपार में चार तरह के विवाह की परंपरा
जनजातीय क्षेत्र गिरिपार में पुरानी परंपरा के अनुसार चार प्रकार के विवाह होते हैं। पहला विवाह बाला ब्याह होता है। इस परंपरा में पहले ही लड़की के विवाह की बात पक्की हो जाती थी। कई बार बच्चे के जन्म से पूर्व भी रिश्ता तय किया जाता था। झाजड़ा परंपरा में दूल्हा बरात लेकर दुल्हन के घर नहीं जाता। दूल्हे के गांव का एक व्यक्ति दुल्हन के घर जाता है और वहां से दुल्हन गांव के सभी लोगों के साथ उस व्यक्ति के साथ दूल्हे के घर पहुंचती है।
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तीसरे प्रकार का विवाह खिताइयूं कहलाता है। एक से अधिक शादियां करने वाली लड़की के विवाह को खिताइयूं कहते हैं। चौथे प्रकार का विवाह हार प्रथा के अनुसार होता है। कोई लड़की या कोई महिला अपनी इच्छा से किसी व्यक्ति के साथ भाग जाती है तो उसे हार विवाह कहते हैं। लड़की को भगाने वाले व्यक्ति को आर्थिक दंड भी लगाया जाता है, जिसे हरोंग कहते हैं। लेकिन, अब ऐसे विवाह की परंपरा लगभग खत्म हो गई है। झाजड़ा प्रथा के अनुसार विवाह अभी भी बरकरार है। इसमें दहेज नहीं दिया जाता। 
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