शिमला। सनातन धर्म सभा की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को सुदामा-कृष्ण की मित्रता का भावपूर्ण वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हुए। दोपहर 2:30 बजे से शुरू हुई कथा में कथावाचक अमित बटुक ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा बचपन के गहरे मित्र थे और दोनों ने एक ही गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की थी। शिक्षा पूर्ण होने के बाद दोनों ने संपर्क बनाए रखने का संकल्प लिया लेकिन समय और परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो गए। सुदामा अत्यंत गरीब ब्राह्मण थे और परिवार का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे। पत्नी के आग्रह पर वह श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। सुदामा की पत्नी ने उनके साथ पोटली में थोड़ा सा पोहा बांध दिया। द्वारका की वैभवशाली नगरी और श्रीकृष्ण के महल को देखकर सुदामा आश्चर्यचकित रह गए। दरबारियों ने उनके साधारण वस्त्र देखकर उपहास किया लेकिन जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण को अपने मित्र के आगमन का पता चला, उन्होंने सुदामा को ससम्मान महल में बुलाया और प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया। कथा में आचार्य नितिन, चेतन और संगीत पर विनय और विख्यात पुनीत मिश्रा ने अपनी सेवाएं दीं। सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि इस कथा में मुख्य आयोजकों में अजय सूद, धर्मपाल पुरी, पूर्णचंद भाटिया और गुलशन अरोड़ा शामिल रहे। संवाद