शिमला। किशोर न्याय बोर्ड शिमला की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी और बोर्ड की सदस्य की बेंच ने किशोर न्याय अधिनियम से जुड़े मामले में फैसला सुनाया है। बोर्ड ने मामले की सुनवाई के बाद विधि के विवादित किशोर की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। इसके बाद उसे हीरानगर स्थित ऑब्जरवेशन होम (बाल सुधार गृह) से रिहा कर दिया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आशंका जताई थी कि यदि किशोर को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह दोबारा अपराध कर सकता है या फरार हो सकता है। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि किशोर को इस मामले में झूठा फंसाया गया है और अपराध से उसका कोई लेना-देना नहीं है। किशोर की माता अपने बेटे की कस्टडी लेने के लिए आगे आईं और बोर्ड के समक्ष उसकी पेशी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ली।