प्रति किलोमीटर 23.32 रुपये की कमाई और 65 रुपये आ रहा था खर्च
कई रूटों पर चल रहीं टैक्सियां भी घाटे में
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में लोगों की सुविधा के लिए कई रूटों पर चलाई जाने वाली कई टैक्सियों के संचालन में एचआरटीसी को लाखों का घाटा उठाना पड़ रहा है। इसी वजह से निगम प्रबंधन ने न्यू शिमला से हाईकोर्ट में संचालित की जाने वाली टैक्सी सेवा को बंद कर दिया है। एचआरटीसी प्रबंधन के मुताबिक इस रूट पर टैक्सी चलाने से उन्हें हर महीने सवा लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। यही वजह है कि निगम प्रबंधन के लिए टैक्सी का संचालन घाटे का सौदा साबित हो रहा था। इसको देखते हुए टैक्सी सेवा को बंद करने का फैसला लिया गया है। प्रबंधन के मुताबिक इस रूट पर प्रति किलोमीटर 23.32 रुपये की कमाई हो रही थी जबकि खर्च 65 रुपये के करीब था। टैक्सी हर रोज रूट पर तीन से चार चक्कर लगाती थी। इस तरह से टैक्सी ही रोज 90 किलोमीटर चल रही थी। इस तरह से निगम को हर रोज 3800 के करीब नुकसान हो रहा था जो कि हर महीने के हिसाब से सवा लाख रुपये के आसपास पहुंच रहा था। एचआरटीसी के मुताबिक इतने बड़े घाटे को हर महीने उनके लिए वहन करना मुश्किल हो गया था। इस वजह से टैक्सी सेवा को बंद करने का फैसला लिया गया है। शहर में एचआरटीसी उपनगरों से मालरोड पहुंचने वाले बुजुर्ग लोगों और अन्यों के लिए विभिन्न टैक्सी सेवाओं का संचालन कर रहा है। संजौली-लक्कड़बाजार रूट के अलावा ज्यादातर रूट घाटे में ही चल रहे हैं। हालांकि इन रूटों पर 50 रुपये प्रति किलोमीटर आमदनी हो रही है। इस वजह से लोगों की सुविधा के लिए इन सेवाओं का संचालन किया जा रहा है। हालांकि इन रूटों पर भी एचआरटीसी को हर महीने हजारों रुपयों का नुकसान उठाना पड़ रहा है लेकिन न्यू शिमला-हाईकोर्ट रूट पर अधिक नुकसान होने के कारण इसका संचालन मुश्किल हो गया था। इसी वजह से कसुम्पटी-हाईकोर्ट रूट पर चलने वाली टैक्सी सेवा को भी एचआरटीसी बंद कर चुका है। इनर टैक्सियों को अब अन्य रूटों पर चलाया जा रहा हैं, जहां पर लोगों के पास बस सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। एचआरटीसी लोकल डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक अंकुर वर्मा ने बताया कि न्यू शिमला-हाईकोर्ट रूट पर अधिक घाटा उठाने के कारण सेवा को बंद करने का फैसला लिया गया है। इन टैक्सियों को अन्य रूटों पर चलाया जा रहा, जहां पर लोगों के पास वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।