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Shimla News: आज से शुरू होंगे श्राद्ध, पितरों की तृप्ति के लिए होगा तर्पण

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शिमला। हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष का मुख्य महत्व दिवंगत पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना है। इस वर्ष पितृ पक्ष यानी शनिवार को पूर्णिमा से श्राद्ध शुरू होंगे और 10 अक्तूबर सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त होंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में श्रद्धा से किया श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान मनुष्य को पितृ ऋण तथा पितृ दोष से मुक्त करता है और पितरों को मोक्ष दिलाता है। श्री राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश चंद्र नौटियाल ने बताया कि इन 15 दिन तक अन्न, जल अर्पित करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है। इस वर्ष शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध, रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध, 29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध और महाभरणी, 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध, एक अक्तूबर को षष्ठी श्राद्ध, 2 अक्तूबर को सप्तमी श्राद्ध, 3 अक्तूबर को अष्टमी श्राद्ध, 4 अक्तूबर को नवमी श्राद्ध, 5 अक्तूबर को दशमी श्राद्ध, 6 अक्तूबर को एकादशी श्राद्ध, 7 अक्तूबर को द्वादशी श्राद्ध, 8 अक्तूबर को त्रयोदशी श्राद्ध, 9 अक्तूबर को चतुर्दशी श्राद्ध और 10 अक्तूबर को सर्वपितृ श्राद्ध होगा। नौटियाल ने कहा कि संतुष्ट पितर परिवार को सुख, समृद्धि, लंबी आयु और आरोग्य का आशीर्वाद देते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है, क्लेश समाप्त होते हैं और वंश सहित रक्त संबंधों का बोध होता है। यह काल पूर्वजों को याद कर कृतज्ञता जताने का है।
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