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कोटखाई रेप केस में CBI की बड़ी कार्रवाई, शिमला के पूर्व एसपी गिरफ्तार, 5 दिन का रिमांड

Fri, 17 Nov 2017 12:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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बहुचर्चित गुडि़या मामले से जुड़े लॉकअप हत्याकांड में सीबीआई ने आईजी समेत 8 पुलिस वालों के बाद अब शिमला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू नेगी को भी गिरफ्तार कर लिया है। मामले को दबाने और फर्जी केस बनाने में शामिल होने के आरोप में एसपी डीडब्ल्यू नेगी पर यह कार्रवाई की गई है। सीबीआई ने रेलवे बोर्ड भवन शिमला स्थित अपनी शाखा में लंबी पूछताछ के बाद वीरवार दोपहर बाद नेगी को गिरफ्तार किया।
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गुडि़या प्रकरण के दौरान नेगी शिमला जिला के पुलिस अधीक्षक थे। वे गुडि़या मामले की जांच को बनाई गई पुलिस एसआईटी में भी शामिल थे। नेगी वर्तमान मेें विजिलेंस की विशेष जांच इकाई के एसपी हैं। गौरतलब है कि सीबीआई गुडि़या मामले में ही आईजी जहूर एच जैदी, डीएसपी मनोज जोशी समेत आठ पुलिस कर्मचारियों को करीब तीन माह पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में कंडा जेल में हैं। 

वीरवार को गिरफ्तारी के बाद एसपी नेगी को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला की अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने नेगी को 20 नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। गुडि़या और लॉकअप मामले की जांच कर रही सीबीआई पिछले कुछ समय से एसपी डीडब्ल्यू नेगी से लगातार पूछताछ कर रही थी। उन्हें गिरफ्तार करने की पहले से ही तैयारी कर ली गई थी। सीबीआई का दावा है कि कुछ तथ्यों के पुष्ट होने में वक्त लग गया। इस कारण नेगी की गिरफ्तारी में देरी हुई।
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सीबीआई ने ऐसे कसा डीडब्ल्यू पर शिकंजा

गुडि़या मामले में गिरफ्तार किए 6 आरोपियों में से एक नेपाली मूल के सूरज की कोटखाई थाने में 18 जुलाई की रात को हत्या हो गई थी। सीबीआई का दावा है कि इस हत्या में पुलिसकर्मियों का हाथ है। हत्या उस समय हुई जब डीएसपी मनोज जोशी की निगरानी में सूरज को लॉकअप से निकालकर पूछताछ की जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक हत्या के बाद डीएसपी मनोज जोशी एसपी डीडब्ल्यू नेगी से मिलने शिमला आए। जोशी आईजी जहूर एच जैदी के घर भी गए।

इसी दौरान योजना बनाई गई कि पुलिस पर बात न आए और इल्जाम दूसरे आरोपी राजू पर मढे़ जाएं कि उसी ने हत्या की है। चूंकि, राजू पहले से ही गुडि़या से दुराचार व हत्या के आरोप में मुजरिम था, इसलिए पुलिस अधिकारी ये मानकर चले कि ये बात किसी को मालूम नहीं होगी। पुलिस ने इस प्रकरण में कोटखाई थाने में तैनात संतरी दिनेश शर्मा से भी जबरन बयान लिखवाया कि उसी के सामने राजू ने सूरज की हत्या की। सीबीआई सूत्रों की मानें तो पुलिस अधिकारी अकेले संतरी को लपेटकर ही इस मामले से साफ बचकर निकलना चाह रहे थे।

मगर सीबीआई की दिल्ली से विशेष टीम के पहुंचने के बाद संतरी ने बयान दिया कि उसके सामने राजू ने सूरज को नहीं मारा। थाना प्रभारी जोशी आरोपी सूरज को थाने से बाहर ले गए थे। रात को नौ बजे से लेकर 12 बजे तक उसकी ड्यूटी थी। उसकी ड्यूटी के दौरान राजू अकेला ही थाने में था। इस बयान को आधार बनाकर सीबीआई ने पुलिस अधिकारियों को लपेटने के लिए तमाम तरह के सबूतों को जुटाया। अब पूछताछ के बाद नेगी को गिरफ्तार कर लिया गया।

क्या है मामला

शिमला के कोटखाई के दांदी जंगल में हलाइला गांव के पास छह जुलाई को दसवीं की छात्रा गुडि़या की निर्वस्त्र लाश मिली थी। इसके बाद पुलिस ने दुराचार और हत्या का केस दर्ज किया। छह आरोपियों को गिरफ्तार कर ये दावा किया गया कि इस प्रकरण को सुलझा लिया गया है। बाद में कोटखाई थाने के लॉकअप मेें इन्हीं मेें से एक आरोपी सूरज की हत्या हो गई।

पुलिस ने कत्ल का आरोप गुडि़या मामले के दूसरे आरोपी राजू पर लगाया। पुलिस जांच पर शक जताते हुए पब्लिक सड़कों पर उतर आई। कोटखाई थाने को ही फूंक दिया गया। प्रदेश और देश भर में प्रदर्शन हुए। हिमाचल हाईकोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए।

सीबीआई गुडि़या से दुराचार के बाद हत्या और लॉकअप मामले की दोहरी जांच कर रही है। सीबीआई ने आईजी, डीएसपी समेत पुलिस एसआईटी के आठ कर्मचारी गिरफ्तार किए। लॉकअप हत्याकांड का चालान भी लगभग तैयार है। इसे कोर्ट में पेश करने से पहले ये गिरफ्तारी की गई है। 

सीएम वीरभद्र के करीबी माने जाते हैं नेगी

मूल रूप से किन्नौर निवासी पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू नेगी को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता है। नेगी को पिछली कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री के सुरक्षा अधिकारी रहे थे।

वर्तमान वीरभद्र सरकार में शिमला जिले के पुलिस अधीक्षक रह चुके डीडब्ल्यू नेगी के पास विजिलेंस ब्यूरो का अतिरिक्त कार्यभार पहले से ही रहा है।

गुडि़या मामले में अधिकारियों पर कार्रवाई के बावजूद उनके पास विजिलेंस ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक का कार्यभार पूर्ववत रखा गया। उन्हें केवल एसपी शिमला पद से हटाया गया था।
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वॉयस सैंपल लेने के मामले की सुनवाई आज

सीबीआई टीम के एसपी एसएस गुरुम, डीएसपी सीमा पाहूजा, एएसपी आरके सेठी
गुड़िया रेप हत्याकांड मामले में पुलिस वालों के वॉयस सैंपल लेने के लिए सीबीआई द्वारा कोर्ट में दी गई अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। सीबीआई ने आईजी, डीएसपी समेत आठों पुलिसवालों की आवाज के नमूने मांगे हैं।

सीबीआई की अर्जी पर बुधवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला रणजीत सिंह की अदालत ने बहस के लिए 17 नवंबर की तिथि तय की है।

सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के पास गुड़िया रेप मामले और इसी से संबंधित लॉकअप हत्याकांड में इलेक्ट्रॉनिक सुबूत हैं। इन्हें पुलिस अधिकारियों, कर्मियों के मोबाइल फोनों के अलावा कंप्यूटर हार्ड डिस् से निकाला गया है। इनमें पाई गई आवाज की पुष्टि के लिए ये वॉयस सैंपल लिए जाने हैं।
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