शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में वर्ष 2019 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है। एसएफआई ने कुलसचिव ज्योति राणा के माध्यम से कुलपति को ज्ञापन सौंपा है। इसमें सहायक प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर हुई नियुक्तियों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। एसएफआई के प्रतिनिधिमंडल में विश्वविद्यालय इकाई सचिव मुकेश कुमार और उपाध्यक्ष आशीष चौहान शामिल थे। संगठन पिछले डेढ़ वर्ष से सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर अनियमितताओं के आरोप लगा रहा है। विश्वविद्यालय ने कुछ मामलों में आंतरिक जांच शुरू की थी लेकिन अब तक कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई है। नए ज्ञापन में एसएफआई ने आरटीआई से मिले अभिलेखों के अध्ययन के बाद आठ और नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया है। एसएफआई ने आठ नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताएं बताई हैं। इनमें सहायक प्रोफेसर के पांच और एसोसिएट प्रोफेसर के तीन पद शामिल हैं। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों के ईडब्ल्यूएस और ओबीसी प्रमाण-पत्र आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जारी हुए, फिर भी स्वीकार किए गए।