शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) शिमला में मंगलवार को संगोष्ठी शुरू हुई। संगोष्ठी का उद्घाटन सरस्वती वंदना से किया गया। संगोष्ठी में संस्थान के फेलो और देशभर से आए विद्वानों ने भाग लिया। गोष्ठी की संयोजिका डॉ. निवेदिता बनर्जी ने गुरु-शिष्य परंपरा से लेकर आधुनिक चुनौतियों तक समग्र शिक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया। संगोष्ठी के पहले दिन मुख्य वक्ता प्रो. वीएन झा (पूर्व निदेशक, संस्कृत अध्ययन केंद्र, पुणे विश्वविद्यालय) ने ऑनलाइन जुड़कर कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक विकास और आध्यात्मिक संतुलन का मार्ग है। इनके अलावा प्रो. शशिप्रभा कुमार (अध्यक्ष, शासी निकाय, आईआईएएस), संस्थान के पुस्तकालय सलाहकार प्रेम चंद, जन संपर्क अधिकारी अखिलेश पाठक ने भी विचार व्यक्त किए। ब्यूरो