हैंड सैनिटाइजर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कोविड के शुरुआती चरण में राज्य सचिवालय में हुए सैनिटाइजर घोटाले की विजिलेंस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान इस बात के संकेत मिले हैं कि टेंडर होने से पहले ही सप्लाई के लिए फर्म का नाम तय हो गया था। ब्यूरो की जांच में पता चला है कि सप्लाई के लिए कोटेशन देने वाली दो फर्मों के दस्तावेज ही पूरे नहीं थे। इसके बावजूद उनके कोटेशन को आवंटन की प्रक्रिया के दौरान कंसीडर कर लिया गया।
जांच के अनुसार लोअर खलीणी की न्यू ईगल सर्विस फर्म की कोटेशन में भरत शर्मा का नाम लिखा था लेकिन फर्म के बारे में कोई विवरण नहीं था। इसी तरह एपी इंटरप्राइजेज फर्म की कोटेशन में भी किसी का न तो नाम था और न ही हस्ताक्षर थे। इसके बावजूद इस कोटेशन को भी कंसीडर कर लिया गया। ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि कोटेशन मंगाने का सिर्फ खेल हुआ जबकि पहले से ही सप्लाई के लिए फर्म तय कर ली गई थी। यही वजह है कि कोटेशन की खानापूर्ति कर सप्लाई ऑर्डर दे दिया गया। यही वजह है कि विजिलेंस इन बिंदुओं पर जांच कर घोटाले की जांच के दायरे में आए सभी सचिवालय के अधिकारियों व कर्मचारियों से जवाब तलब कर रही है।