शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के सरेंडर किए रूट परमिटों पर सवाल उठाने शुरू हो गए हैं। संघ का कहना है कि कई ऐसे रूट सरेंडर किए हैं, जोकि कभी एचआरटीसी को दिए ही नहीं। संघ के प्रदेश महासचिव रमेश कमल ने कहा कि परिवहन विभाग इसकी जांच करें। एचआरटीसी की ओर से शिमला समेत पूरे प्रदेश में 422 के करीब रूट सरेंडर किए हैं। संघ का कहना है कि सरेंडर किए रूटों को निजी क्षेत्र में देने से युवाओं को कर्ज के बोझ के नीचे दबाया जा रहा है। मझाणा-शिमला, माहोरी ठियोग जैसे रूट एचआरटीसी को दिए नहीं थे उन्हें भी सरेंडर में दिखाया है। संवाद