शहर में दिवाली पर कम चले
पटाखे, प्रदूषण का स्तर घटा
बीते साल की तुलना में इस बार वायु गुणवत्ता सूचकांक 35 रहा, बीते साल था 38
पिछली साल की अपेक्षा दस टन कम निकला कचरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दिवाली के जश्न में इस बार राजधानी की आबोहवा ज्यादा प्रदूषित नहीं हुई है। बीते साल की तुलना में इस बार न सिर्फ वायु प्रदूषण कम हुआ बल्कि शहर से पटाखों का कचरा भी कम निकला है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार शिमला में दिवाली के दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक 35 रहा।
शून्य से 50 के बीच का सूचकांक उत्तम माना जाता है। बीते साल यह सूचकांक 38 रिकॉर्ड किया गया था। शिमला का औसतन सूचकांक 29 है। बाकी शहरों में दिवाली की रात प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ा है जबकि शिमला में यह 29 से 35 तक ही रहा। शहरवासियों ने इस बार समझदारी दिखाते हुए दिवाली का जश्न मनाया। काफी लोगों ने ग्रीन पटाखे ही चलाए। वहीं शहर में पटाखे भी कम चले हैं।
पटाखा कारोबारियों के अनुसार महंगाई के चलते इस बार पटाखों की बिक्री पिछले साल से कम रही। कई कारोबारियों के पास पटाखों का स्टॉक बच गया है। इसके अलावा दिवाली के दूसरे दिन मंगलवार को शहर से कचरा भी कम निकला है। नगर निगम प्रशासन ने अनुसार मंगलवार को शहर से करीब 80 टन कचरा निकला है। यह सामान्य दिनों की तुलना में 10 टन ज्यादा है। इस दस टन में भी ज्यादातर कचरा बाजारों से निकला है जिसमें दिवाली की पैकिंग से जुड़ा कागज, गत्ता आदि शामिल है। बीते साल दिवाली के दूसरे दिन शहर से करीब 90 टन कचरा निकला था। नगर निगम की टीमों ने सुबह ही स्वीपिंग मशीनों से रिज मैदान और मालरोड पर सफाई की। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी सुबह सफाई करवाई गई। हालांकि, पहाड़ियों पर कुछेक जगह बुधवार से सफाई अभियान चलाया जाएगा।
स्वच्छ शहरों में शिमला का 56वां रैंक
स्वच्छ शहरों की रैंकिंग में शिमला का इस बार 56वां रैंक आया है। बीते साल शिमला 102वें नंबर पर रहा था। शहरवासियों की फीडबैक और सफाई के प्रति जागरूकता से शिमला शहर की रैंकिंग में उछाल आया है।
शहर से इस बार कम कचरा : डॉ. चेतन
शहर से इस बार दिवाली पर पिछले सालों की तुलना में कम कचरा निकला है। पटाखे का कचरा इस बार कम रहा। नगर निगम ने सुबह ही शहर में सफाई करवा दी थी। शहर से करीब 80 टन कचरा उठाया है।
-डॉ. चेतन चौहान, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम शिमला