भारतीय सेना के पायलट पूर्व में भी घाटी में अभ्यास करते आए हैं और चार वर्ष पूर्व सेना की ओर से प्रतियोगिता का आयोजन किया जा चुका है। 16 सितंबर से पैराग्लाइडिंग पर रोक हटने पर उड़ानों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पिछले दो वर्षों में करोना के कारण अंतरराष्ट्रीय पैराग्लाइडर पायलटों की उपस्थिति न के बराबर रही है। इस वर्ष बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय पायलटों के घाटी में दस्तक देने की उम्मीद है। प्रत्येक वर्ष अक्टूबर और नवंबर माह में एक दर्जन देशों के पायलट उड़ानों के लिए घाटी में दस्तक देते आए हैं। एसडीएम सलीम आजम ने बताया कि भारतीय सेना के पायलट ने सितंबर माह में अभ्यास उड़ाने भरने के लिए आवेदन किया है।
बिलिंग घाटी को देखने और यहां पैराग्लाइडिंग करने के लिए दुनियाभर से पर्यटक आते हैं। विभिन्न राज्यों के शैक्षणिक स्थानों से भी बच्चे इस जगह का लुत्फ उठाने के लिए पहुंचते हैं। बीड़ पैराग्लाइडिंग की टेक ऑफ साइट और बिलिंग लैंडिंग साइट है। बीड़, कांगड़ा जिले के पालमपुर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर है। वहीं, बिलिंग की दूरी बीड़ से करीब 14 किलोमीटर है।