फ्रांस में दोनों धर्मगुरुओं की मुलाकात के बाद धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बत संसद में करमा काग्यू सेक्ट के प्रतिनिधि के तौर पर बतौर सांसद बने टेंपा यारफेल ने इस घटनाक्रम को सकारात्मक बदलाव की संज्ञा दी। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रवक्ता सोनम दोगपो ने कहा कि दोनों बौद्ध धर्मगुरुओं की मुलाकात का सरकार स्वागत करती है।
उग्येन त्रिनले दोरजे को करमापा के रूप में खुद दलाईलामा ने मान्यता दी है। इसलिए, तिब्बतियन उग्येन त्रिनले दोरजे को असली करमापा के रूप में मानते हैं।फिर भी उग्येन त्रिनले दोरजे किसी भी मतभेद को सुलझाना चाहते हैं तो इससे जरूर सकारात्मक लाभ मिलेगा।
सिक्किम में बौद्ध धर्म के लोग करीब 900 से ज्यादा वर्ष पुराने करमा काग्यू संप्रदाय के अनुयायी हैं। करमा काग्यू संप्रदाय तिब्बती बौद्ध धर्म के चार संप्रदायों में से एक है। इसके खिताब पर दो अलग दावेदारियों के चलते संप्रदाय भी बंट गया है।