शिमला। राजधानी के गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में सोमवार को मोहिनी एकादशी व्रत कथा सुनाई गई। सुबह 8:30 बजे से शुरू हुई इस कथा में मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में भद्रावती नगरी में एक राजा रहता था जिसका नाम राजा धृतिमान था। वह बहुत ही धर्मात्मा और प्रजा का पालन करने वाला राजा था, उसके पांच पुत्र थे जिनमें सबसे छोटा पुत्र धृष्टबुद्धि अत्यंत दुराचारी और पापी था। धृष्टबुद्धि जुआ, चोरी और बुरे कर्मों में लिप्त रहता था। इसकी बुरी आदतों से परेशान होकर राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया। राज्य से बाहर जाने के बाद वह जंगल में भटकने लगा और अपने पापों का फल भोगने लगा। एक दिन भटकते-भटकते वह कौंडिन्य ऋषि के आश्रम पहुंचा। वहां उसने ऋषि से अपने दुखों का कारण पूछा और उनसे मुक्ति का उपाय जानना चाहा। ऋषि कौंडिन्य ने कहा कि हे पुत्र तुम्हारे पापों का नाश केवल मोहिनी एकादशी का व्रत करने से ही संभव है। उन्होंने उसे व्रत की विधि बताई। धृष्टबुद्धि ने पूरे श्रद्धा और नियम के साथ मोहिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उसके सारे पाप नष्ट हो गए और अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। संवाद