शिमला। तिब्बती बौद्ध दर्शन का विकास किन परंपराओं और विचारों के समन्वय से हुआ इस विषय पर जापान के सोका विश्वविद्यालय के प्रो. काजुनोरी सासाकी ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में व्याख्यान दिया। बौद्ध अध्ययन विभाग की व्याख्यान श्रृंखला के तीसरे संस्करण में उन्होंने लामरिम, बोधिचित्त और ग्रेट वेव ऑफ कंडक्ट के दार्शनिक एवं ऐतिहासिक पक्षों को सामने रखा। प्रो. सासाकी ने तिब्बती बौद्ध परंपरा के निर्माण और बौद्ध चिंतन के विकास में इन अवधारणाओं की भूमिका को समझाया। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने बौद्ध दर्शन और क्वांटम विज्ञान के बीच संभावित संवाद को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों अलग-अलग बौद्धिक परंपराओं से जुड़े होने के बावजूद वास्तविकता, परस्पर निर्भरता और अवलोकन जैसे विषयों पर समान विमर्श की संभावनाएं हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. अपर्णा नेगी ने कहा कि व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य बौद्ध दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ अकादमिक संवाद स्थापित करना है। संवाद