हिमाचल प्रदेश के मंडी में किरतपुर-मनाली फोरलेन के पंडोह बाईपास टकोली प्रोजेक्ट एक साल में यातायात के लिए पूरी तरह से बहाल हो जाएगा। शनिवार को प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण नौवीं सुरंग के दोनों छोर आपस में मिल गए।
इस सुरंग की लंबाई 2.74 किलोमीटर है। सुरंग पूरे प्रोजेक्ट का प्रवेश द्वार है। इस सुरंग को आरएचएस के नाम से जाना जाता है। इसके समानांतर एलएचएस के नाम से एक और सुरंग का निर्माण किया जा रहा। वह प्रोजेक्ट की दसवीं सुरंग है।
दो से तीन माह में इसके दोनों सिरे भी मिल जाएंगे। नौवीं सुरंग के दोनों सिरे मिलने के अवसर पर इसके निर्माण में जुटी एफकॉन्स कंपनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रणजीत कुमार सिंह ने भी मौजूद रहे। उन्होंने टीम के साथ सुरंग का निरीक्षण किया। रणजीत ने कहा कि एक साल के अंदर प्रोजेक्ट को पूरा कर देंगे। उन्होंने बताया कि पंडोह बाईपास टकोली प्रोजेक्ट का निर्माण करना सबसे चुनौतीपूर्ण और कठिन था। इसके बावजूद इस काम को सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट की पांच सुरंगों को यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है। पूरा प्रोजेक्ट को अगले एक वर्ष के भीतर यातायात के लिए पूरी तरह से सुचारू कर दिया जाएगा। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विनोद ठाकुर, साइट इंचार्ज राजेंद्र वर्मा और जियोलॉजिस्ट अमित कुमार ने बताया कि सुरंग का निर्माण करनाचुनौतीपूर्ण था। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां बिल्कुल विपरित हैं। सुरंग की खुदाई के दौरान कई बार कैवेटी का सामना करना पड़ा लेकिन बेहतरीन कार्यकुशलता का परिचय देते हुए सुरंग का काम पूरा किया गया।
बता दें कि सामरिक महत्व वाले किरतपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट में पंडोह बाईपास टकोली प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य सबसे महत्वपूर्ण और चुनौती भरा था। इस काम को शाहपुरजी-पलौनजी और एफकॉन्स कंपनी की ओर से किया जा रहा है। अब यह प्रोजेक्ट अब अंतिम चरण पर है। इसके बनने से जहां सेना को इसका लाभ मिलेगा वहीं कुल्लू-मनाली आने वाले पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी आने-जाने में सुविधा होगी।