हिमाचल प्रदेश और बाहरी राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ने का असर हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में देखने को मिल रहा है। एक सप्ताह के भीतर निगम के लंबे रूटों पर चलने वाली बसों की कमाई घट गई है। ऐसे में प्रबंधन ने दिल्ली के लिए 12 बस रूटों को मर्ज कर दिया है। दिल्ली सरकार की हिमाचल आने वाली बसों में भी सवारियों की संख्या काफी कम है। ऐसे में निगम प्रबंधन को प्रतिदिन रूटों की समीक्षा करने को कहा गया है। प्रदेश के लोकल रूट और लांग रूटों पर पहले की तरह सेवाएं जारी रहेंगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी बस रूट फायदे वाले हैं। कोरोना के मामले बढ़ते रहे तो निगम और घाटे में जाएगा।
50 फीसदी ऑक्यूपेंसी पर अभी फैसला नहीं
प्रदेश की बसों में 50 फीसदी सवारियों की ऑक्यूपेंसी पर अभी फैसला नहीं हुआ है। प्रदेश सरकार ने बसों में कोरोना के नियमों का पालन करने को कहा है।
निशुल्क पास बार-बार बनाने का झंझट खत्म
वहीं, कैंसर, डायलिसिस और स्पाइन बीमारी से ग्रस्त मरीजों को अस्पताल में जांच कराने के लिए एचआरटीसी अड्डा इंचार्ज के पास निशुल्क बस पास बनाने की जरूरत नहीं होगी। डॉक्टर की पर्ची के आधार पर इन मरीजों के पास बन सकेंगे। डाक्टर ने अगर हफ्ते में चार बार चैकअप के लिए अस्पताल बुलाया है तो ऐसे स्थिति में यह पास एक महीने का बनेगा। निगम प्रबंधन ने इस बारे आदेश जारी किए हैं। इससे पहले इन मरीजों को एक और दो दिन आने जाने के लिए निशुल्क पास बनता था। आईजीएमसी और टांडा में इन मरीजों का उपचार होता है।