हिमाचल प्रदेश विधानसभा सत्र के छठे दिन राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के जवाब पर विपक्ष भड़क उठा और नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके चलते शाम 7 बजे तक चलने वाली कार्यवाही डेढ़ घंटे पहले ही समाप्त करनी पड़ी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष की ओर से इस्तेमाल किए गए शब्दों की निंदा की और सभापति से आवश्यक कार्रवाई की मांग की। सभापति ने कहा कि यदि सतापक्ष भर्त्सना प्रस्ताव लाता है तो उस पर विचार किया जाएगा। साथ ही सदन में उपयोग किए गए आपत्तिजनक शब्दों को कार्यवाही से हटाने की भी घोषणा की।
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दोपहर बाद नियम 130 के तहत प्राकृतिक आपदा पर लाई गई चर्चा का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री नेगी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने सदन में 40 मिनट तक केवल अपने क्षेत्र सराज की ही बात की, जबकि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में हुई तबाही का उल्लेख नहीं किया। नेगी ने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री कार्यकाल में सराज में सड़कों के निर्माण के लिए 400 करोड़ खर्च किए गए। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई, कटे पेड़ मिट्टी के नीचे दफना दिए गए और मलबा नदी-नालों के किनारे फेंका गया। लगभग 16 हेलीपैड बनाए गए। निर्माण के लिए एफआरए की अनुमति तक नहीं ली गई और न ही वैज्ञानिक तकनीक का पालन किया गया, इसके कारण भारी बरसात में क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ।
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नेगी के आरोपों पर नेता प्रतिपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और इसे भ्रामक बताते हुए आपत्ति दर्ज करवाई। इसके बाद विपक्ष के सभी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए। वॉकआउट के बाद सभापति ने कार्यवाही वीरवार तक के लिए स्थगित कर दी।
दो साल से चल रहे प्रश्नों के नहीं मिल रहे उत्तर : जयराम
हिमाचल प्रदेश सरकार सदन और सदन के बाहर जवाब देने से पूरी तरह से बच रही है। दो साल से जिन प्रश्नों को विधानसभा में पूछा जा रहा है, आज भी उन प्रश्नों का उत्तर सूचना एकत्रित की जा रही है। यह जवाब दिया जा रहा है। यह बात बुधवार को विधानसभा सदन से बाहर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पत्रकारों से कही। उन्होंने कहा कि विधायकों का यह हक है कि वह विधानसभा में प्रश्न पूछें और उसका जवाब हासिल करें, लेकिन सरकार उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने की कोशिश कर रही है। स्थिति ऐसी बन गई है कि सरकार जवाब ही नहीं दे पा रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से मंडी में मनाए जाने वाले तीन साल के जश्न पर कहा कि प्रदेश सरकार आपदा के पैसे को जश्न पर खर्च करने जा रही है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदेश सरकार को चाहिए था कि वह इस पैसे को जश्न पर खर्च करने के बजाए, उन लोगों को राहत देने के रूप में खर्च करती। जो इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जोरावर स्टेडियम में उनके प्रदर्शन की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। सरकार ने पहले जोरावर में प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन उन्होंने अब 5000 कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन करने को कहा है। जब हम सत्ता में थे तो हमने कभी भी किसी को प्रदर्शन करने से नहीं रोका। किसी ने अगर जोरावर स्टेडियम मांगा तो उसे हमने प्रदर्शन के लिए इसकी अनुमति दी। विधानसभा के घेराव को लेकर पूछे गए प्रश्न पर जयराम ठाकुर ने कहा कि अभी उनका जोरावर स्टेडियम में ही प्रदर्शन करने की योजना है, अगर सरकार उन्हें प्रदर्शन करने से रोकती है तो वह विधानसभा परिसर में भी प्रदर्शन करने से गुरेज नहीं करेंगे।
एबीवीपी के प्रदर्शन से पहले कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में लेने के मामले पर उन्होंने कहा कि संस्थाओं को यहां सभी संस्थाओं को लोकतांत्रिक अधिकार है कि वे प्रदर्शन करें। विद्यार्थी परिषद को भी अपनी बात कहने का अधिकार है। जयराम ने कहा कि जॉब ट्रेनिंग पॉलिसी पर मुख्यमंत्री ने जो बात कही है, उस से वह सहमत नहीं हैं। प्रदेश उच्च न्यायालय मामले पर संज्ञान लेता है कॉन्ट्रेक्ट शब्द पर न्यायालय का ऑब्जेक्शन था, अब जैसे ही उन्हें पता चलेगा तो मामला फिर वही पहुंच जाएगा।