विश्व की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में शुमार ऐतिहासिक श्रीखंड महादेव यात्रा में लापता दो श्रद्धालुओं की भी मौत हो गई है। अब तक चार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पहले ही दिन फेफड़ों में पानी भरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि दूसरे दिन ग्लेशियर से तीन लोगों के फिसलने के बाद गहरी खाई में गिरने से आई चोटों से उनकी मृत्यु हो गई है। इनमें से सोलन के एक व्यक्ति की बीते रोज ही जानकारी उपलब्ध हो गई थी।
लेकिन दो व्यक्तियों को रेस्क्यू टीम ने देर शाम खोज निकाला। इनका पार्वतीबाग से संपर्क न होने के चलते प्रशासन को समय रहते जानकारियां उपलब्ध नहीं हो पाईं। पार्वतीबाग बेसकैंप में सूचनाओं के आदान-प्रदान न होने के चलते प्रशासन को भी सूचनाओं को साझा करने में खासी मुश्किलें पेश आ रही है। भारी बारिश के चलते जहां यात्रा दो दिनों के लिए स्थगित कर दी गई है। वहीं यदि मौसम खराब रहा तो यात्रा मुश्किलों से भरी सकती है।
एक ओर जहां पार्वतीबाग से ऊपर भारी बारिश के चलते रास्ते खराब हो गए हैं, जिन्हें पार्वतीबाग में मौजूद अटल बिहारी बाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान मनाली के बचाव दल की टीम दुरूस्त करने में जुटी है। वहीं लगातार बारिश से भी रेस्क्यू टीम को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। एसडीएम निरमंड मनमोहन सिंह ने भी संकेत दिए हैं कि यदि बारिश नहीं थमी तो यात्रा पर निकले यात्रियों को जहां टेंटों में ठहराया गया है, उन्हें नीचे उतारा जा सकता है।
टेंटों में ठहराए गए हैं हजारों श्रद्धालु
दो दिनों में श्रीखंड महादेव यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को जगह-जगह टेंटों में ठहराया गया है। बेसकैंप सिंघगाड़ में 300, बराहटीनाला में 65, थाचडू में करीब 450, कुनशा में करीब 150 , पार्वतीबाग में करीब 1200, जबकि पार्वतीबाग में करीब सौ यात्रियों के अलावा लोकल लोगों की ओर से लगाए गए टेंटों में करीब 350 यात्री ठहरे हुए हैं। इनमें करीब सौ यात्रियों को ठंड के चलते पार्वतीबाग से निचले बेसकैंप भीमडवारी उतारा गया है। हालांकि कंबलों और खाने की पूरी व्यवस्था मौजूद है। लेकिन यदि मौसम ने साथ नहीं दिया तो यात्रा को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
श्रद्धालु बोले-इस बार बहुत खतरनाक है श्रीखंड महादेव यात्रा
श्रीखंड यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं का कहना है कि इस बार की यात्रा श्रद्धालुओं को मुश्किलों में डाल सकती है। पार्वतीबाग से ऊपर श्रीखंड की करीब तीन घंटे की चढ़ाई में लगातार बर्फ ही बर्फ है। यहां बैठने के लिए भी खाली जगह नहीं है। यहां विश्राम भी खड़े-खड़े ही करना पड़ता है।
श्रीखंड यात्रा से लौटे आनी के शिव भक्त पूर्ण सक्सेना ने कहा कि इस बार नैन सरोवर होकर रास्ता न होने के चलते श्रद्धालु पार्वतीबाग से सीधा श्रीखंड महादेव की चढ़ाई चढ़ रहे हैं। इसमें लगातार ग्लेशियर होने के चलते दिक्कतें पेश आ रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्लेश्यिरों के पिघलने से रास्ते में बहुत ज्यादा फिसलन है।