अधिकारियों की लंबी खींचतान के बीच सरकार ने मंगलवार को रोप-वे एंड रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम कॉरपोरेशन के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह मामला लटका हुआ था। बताया जा रहा है कि कई अधिकारी इस कॉरपोरेशन के गठन के पक्ष में नहीं थे। कॉरपोरेशन बनाए जाने से पर्यटन विभाग का काम कम हुआ है, क्योंकि इस निगम का संचालन परिवहन विभाग करेगा।
सरकार का मानना है कि हिमाचल में अब रोपवे निर्माण और पर्यटन से जुड़े अन्य विकास कार्यों को गति मिलेगी। इस आधार पर राज्य में रोपवे निर्माण, यात्रियों को सुहाने सफर की सुविधा मुहैया होगी। यातायात समस्या से जूझ रहे शहरों में ट्रांसपोर्ट सिस्टम, मोनोरेल जैसे प्रोजेक्ट भी इसी कॉरपोरेशन के तहत पूरे होंगे। इसका संचालन परिवहन विभाग करेगा।
इससे पहले प्रदेश में रोपवे का निर्माण पर्यटन विभाग कर रहा था। अभी तक प्रदेश में रोपवे निर्माण को लेकर कोई अलग एजेंसी नहीं थी। यह पहली बार हुआ है कि सरकार ने हिमाचल में पर्यटन को गति देने के लिए कॉरपोरेशन गठित किया है।
शांता सरकार के प्रस्तावित रोप-वे भी नहीं बन पाए
1990 और 1992 में रही शांता सरकार की ओर से प्रस्तावित रोप-वे भी अभी तक नहीं बन पाए। इसके बाद वीरभद्र और धूमल सरकारों ने भी दर्जनों प्रस्ताव रखे, जो तकनीकी और बजट के अभाव में फंसे पडे़ हैं। इनके अलावा हिमाचल में कई स्थानों पर रोपवे का निर्माण होना प्रस्तावित हैं। हाल ही में आनंदपुर से श्रीनयना देवी के लिए रोपवे को मंजूरी मिल चुकी है, वहीं शिमला में जाखू रोपवे तैयार किया जा चुका है। ऐसी कई परियोजनाओं को अब कार्यरूप मिल सकता है।