आधार नंबर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच प्रदेश के राजस्व विभाग ने अपनी वेबसाइट से आधार का पुराना डेटा हटा दिया है। साथ ही वेबसाइट से वह लिंक ही हटा दिया है जिससे आधार नंबर डालकर उस आधार धारक के नाम पर हुई रजिस्ट्रियों की जानकारी भी नहीं मिल सकेगी।
वहीं, जमीन पंजीकरण के लिए आधार के ऑप्शन को खत्म कर दिया है। राजस्व विभाग के निदेशक भूमि रिकॉर्ड देवासेन नेगी ने इसकी पुष्टि की है। नेगी ने कहा कि फिलहाल पुराने आधार डेटा को भी वेबसाइट से हटाकर सुरक्षित किया गया है। आईटी विभाग से आगे के निर्देश आने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
कुछ समय पहले निजता का अधिकार के तहत आधार और डाटा लीक होने का विवाद खड़ा होने के बाद से हिमाचल में आधार लिंक करने को लेकर उहापोह की स्थिति थी। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग से लेकर राजस्व, एनआईसी व अन्य सभी विभाग परेशान थे कि आखिर इसको लेकर करें क्या?
इसी उहापोह की स्थिति के बीच राजस्व विभाग ने अपनी वेबसाइट से वो ऑप्शन हटा दिया जिसमें आधार नंबर डालकर यह पता लगाया जा सकता था कि संबंधित आधार धारक के नाम से कितने पंजीकरण अथवा संपत्ति है। विभाग ने जमीन पंजीकरण के समय लिए जाने वाले आधार नंबर की बाध्यता खत्म कर दी है।
दरअसल, पारदर्शिता व गड़बड़ी रोकने के लिए राजस्व विभाग ने पंजीकरण के समय आधार साझा करने की व्यवस्था शुरू की थी। आधिकारिक सूत्रों का कहना था कि इसकी वजह से पंजीकरण में गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो गई थी। कहा कि अभी भी इसको लेकर नई व्यवस्था की जा रही है।