जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। रिहायशी इलाकों में रुक रुककर बर्फबारी हो रही है। बर्फबारी अधिक हुई तो 12 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान करवाना अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर स्पीति घाटी में मौसम मुश्किलें पैदा कर सकता है। स्पीति घाटी के अधिकतर पोलिंग बूथ 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। विश्व का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र टशीगंग समुद्र तल से 15,256 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। अधिक बर्फबारी होने पर पोलिंग बूथों तक पहुंचने में पोलिंग पार्टियों को दिक्कतें हो सकती है। इसी के मद्देनजर निर्वाचन विभाग ने तैयारियां की है। बर्फबारी होने की स्थिति में पोलिंग पार्टियों को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने के लिए आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवान मोर्चा संभालेंगे। बीआरओ की मशीनरियों की मदद से पोलिंग बूथों तक पहुंचने वाले सड़क मार्ग बहाल किए जाएंगे।
लाहौल-स्पीति जिले की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नेताओं के लिए चुनाव प्रचार करना जितना मुश्किल है, चुनाव प्रक्रिया को पूर्ण करवाना उससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है। स्पीति घाटी में सबसे अधिक दिक्कत है। यहां के लिए ईवीएम मशीनें पहले ही हेलिकाप्टर के माध्यम से पहुंचा दी गई है। स्पीति के ज्यादातर पोलिंग बूथ 12 हजार फीट की ऊंचाई पर हैं। ऐसे में अधिक पड़ने वाली बर्फ की वजह से मतदान में दिक्कत पैदा हो सकती है। लाहौल और स्पीति में वोटरों की संख्या 24,744 है। इसके लिए 92 मतदान केंद्र बने हैं, जिसमें करीब 368 पोलिंग अधिकारी व कर्मचारी व्यवस्था को देखेंगे।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त लाहौल-स्पीति सुमित खिमटा ने बताया कि मौसम से निपटने के लिए अलग से प्रबंध किए गए हैं। बीआरओ 70 आरसीसी और 94 आरसीसी के साथ संपर्क किया गया है। बर्फबारी अधिक होने की सूरत में तुरंत पोलिंग बूथों के लिए सड़क मार्ग बहाल किए जाएंगे। जहां-जहां बर्फबारी के कारण सड़के अवरुद्ध होने की आशंका रहती है वहां पर मशीनरियां पहले ही पहुंचाई जा चुकी है। 35 फोर व्हील वाहनों की भी पहले ही व्यवस्था कर दी गई है। जरूरत पड़ी तो पोलिंग पार्टियों को फोर व्हील वाहनों में भेजा जाएगा। एनडीआरएफ के जवान भी यहां पहुंच गए हैं जबकि, आईटीबीपी के जवान भी मोर्चा संभालेंगे। इसके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं खेल संस्थान के पर्वतारोहियों की भी मदद ली जाएगी।