हिमाचल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा स्वयं प्रदेश में रहकर ही कमान संभाले हुए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस जो बोलती है, उसे जनता अब गंभीरता से नहीं लेती है। हिमाचल की जनता का भी विश्वास व आशा भाजपा से ही है। नड्डा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कई मुद्दों पर खुलकर जवाब दिए।
कांग्रेस ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) व एक लाख रोजगार को सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में स्वीकृत कराने की घोषणा कर चुकी है। इन दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर भाजपा का क्या स्टैंड है?
देखिए कांग्रेस में जो पढ़ता है वह लिखता नहीं और जो लिखता है वह पढ़ता नहीं। घोषणा पत्र की भी न नेताओं और न जनता से चर्चा की गई। आजाद भारत में अभी तक का कोई ऐसा वाकया नहीं है कि नौकरी देने का कैबिनेट नोट तैयार हुआ हो। नौकरी के अवसर का कैबिनेट नोट बनता है। जैसे बल्क ड्रग पार्क भाजपा की डबल इंजन सरकार की कोशिशों से स्वीकृत हुआ है। इससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ऐसा पांच साल में हुआ है। ओपीएस पर भी कांग्रेस झूठ बोल रही है।
आम आदमी पार्टी (आप) हिमाचल में सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। गुजरात में आप के नेता सरकार बनाने के दावे बढ़-चढ़कर कर रहे हैं। क्या कहेंगे?
बता देता हूं, हिमाचल में 68 में से 67 सीटों पर आप की जमानत जब्त होगी। गुजरात विधानसभा चुनाव के अलावा दिल्ली नगर निगम चुनाव में भी इनका यही हाल होना है। उत्तराखंड, गोवा व उत्तर प्रदेश के चुनावों में भी इन्होंने इसी तरह का दावा किया था, लेकिन गोवा में 39 में से 35 सीटों पर, उत्तराखंड में 69 में से 65 सीटों पर इनकी जमानत जब्त हुई थी।
गुजरात में उम्मीदवारों को लेकर घोषणा कब तक होगी?
गुजरात विधानसभा व दिल्ली नगर निगम चुनावों को लेकर दिल्ली में बैठक होनी है। मंगलवार को ही हिमाचल से निकलकर शाम को बैठक में शामिल रहूंगा। गुजरात चुनाव के लिए भाजपा के उम्मीदवारों की पहली सूची 10 नवंबर तक संभावित है।
टिकट न मिलने से भाजपा के कई असंतुष्ट मैदान में हैं। पिछले चुनावों के आंकड़े देखे जाएं तो भाजपा-कांग्रेस के बीच जीत का प्रतिशत करीब 7 फीसदी ही होता है। ऐसे में बागियों से नुकसान तो नहीं पहुंचेगा?
अधिकांश असंतुष्टों के मामले में हल निकाला जा चुका है। इस बार रिवाज तो बदलेगा ही, साथ ही हम जीत व मार्जिन दोनों को लेकर आश्वस्त हैं। जनता इस बार भाजपा पर ज्यादा भरोसा जताने जा रही है।
इस चुनाव में डबल इंजन को काफी तवज्जो दी जा रही है। विपक्ष इसे हमले के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। आपको लगता है कि केंद्र व राज्य सरकारों का एक इंजन में कुछ कमी हो तो दूसरा इंजन बैकअप दे देता है?
हिमाचल का मैंने सारा वातावरण देखा है। दिल्ली के आशीर्वाद से ही प्रदेश चलता है। हिमाचल के लिए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपनापन भी है। भाजपा की डबल इंजन सरकार के कामों को देखकर अब हिमाचल हर पांच साल में सरकार बदलने का रिवाज ही बदलने जा रहा है। यहां पर फिर से भाजपा की सरकार बनाकर इतिहास रचने को लोग आतुर हैं।