भाजपा का चुनाव घोषणापत्र 4 नवंबर को जारी होगा। इसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दोपहर बाद ढाई बजे पीटरहॉफ शिमला में लांच करेंगे। घोषणापत्र में ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) को लेना है कि नहीं, इस बारे में असमंजस है। भाजपा इसे लागू करेगी कि नहीं, इस पर भी संशय बना है। भाजपा कर्मियों, किसानों-बागवानों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों समेत तमाम वर्गों को घोषणापत्र में शामिल करने का प्रयास कर रही है। उधर, कांग्रेस 5 नवंबर को घोषणापत्र जारी करेगी। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस के नेता घोषणापत्र जारी करेंगे।
घोषणापत्र में कांग्रेस ओपीएस को लेकर कर्मियों के अलावा किसानों, बागवानों, महिलाओं और युवाओं को साधेगी। दस गारंटियों को फिर दोहराया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक कर्नल धनीराम शांडिल को घोषणापत्र कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। कर्नल शांडिल ने सभी नेताओं और समाज के विभिन्न वर्गों से बातचीत करने के बाद घोषणापत्र तैयार किया है। घोषणापत्र को कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं की मंजूरी के लिए भेजा गया है। 5 नवंबर को कांग्रेस हिमाचल की जनता को घोषणापत्र के माध्यम से आगामी पांच वर्षों में किए जाने वाले कार्यों का ब्योरा देगी।
ओपीएस पर प्रधानमंत्री करें अपना मत स्पष्ट: आनंद
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सोलन में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में भाजपा की ओर से ओपीएस पर सवाल उठाने के मुद्दे पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल आ रहे हैं। वह स्पष्ट करें कि देश में ओपीएस लागू करने पर उनका क्या मत है। कांग्रेस नेताओं ने सोच-समझकर घोषणापत्र तैयार किया है। इसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा है। इससे भाजपा नेता बौखलाहट में हैं। वह लगातार हिमाचल पहुंच रहे हैं, मगर उनके पांव तले जमीन खिसकने वाली है। कहा कि आज जनता सरकार से पिछले पांच साल का हिसाब मांग रही है। बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार बड़े मुद्दे हैं। प्रधानमंत्री ने 2014 के चुनाव के समय सत्ता में आने पर हर साल दो करोड़ नौकरियां देने की बात कही थी। केंद्र में आठ साल से उनकी सरकार है, लेकिन बेरोजगारों को नौकरी नहीं मिली। उन्हें इसका जवाब देना चाहिए। कहा कि आज हिमाचल जैसे छोटे राज्य में लाखों की संख्या में बेरोजगार लोग हैं। इस पर बात होनी चाहिए। इसकी जवाबदेही सत्ता पक्ष की है।