धर्मशाला-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर खोखा। (फाइल फोटो)
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बिलासपुर के मंगरोट नामक जगह पर शिमला-धर्मशाला राष्ट्रीय राजमार्ग में निकली निजी भूमि को मालिक ने वापस मांगा है। भूमि मालिक के बेटे ने इस बारे उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा हैं। ज्ञापन के माध्यम से चेताया भी गया है कि यदि एक माह के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो भूमि पर कब्जा कर लेगा। इससे यदि राजमार्ग पर कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेवार प्रशासन होगा। ज्ञापन में राजनकांत गांव मंगरोट, बिलासपुर ने बताया है कि शिमला-धर्मशाला राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगरोट गांव में मां के नाम 15 बिस्वा जमीन है, जिसमें से आठ बिस्वा पर लोक निर्माण विभाग कई साल से अवैध कब्जा करके सड़क बनाई हुई है।
प्रशासन की ओर से करवाई गई निशानदेही में भी राजमार्ग की आठ बिस्वा भूमि मां के नाम पाई गई है। विभाग के इस कारनामे से उसे प्रतिदिन हजारों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। राजनकांत ने मांग की है कि 30 दिन के भीतर लोक निर्माण विभाग से कब्जा छुड़ाया जाए ताकि वह मलकीत भूमि पर अपना व्यवसाय सुचारू रूप से कर सके। यदि मांग नहीं मानी गई तो उसे जबरदस्ती अपनी मलकीत भूमि पर कब्जा करना पड़ेगा।
यह था पूरा मामला
पिछले साल दिसंबर में उच्च न्यायालय के आदेश पर मंगरोट में राजमार्ग के किनारे से भूमि मालकिन सीता देवी के बेटे राजन कांत शर्मा के खोखे को हटाया गया था। इसके बाद से यह भूमि विवाद शुरू हो गया। राजनकांत शर्मा ने तब राजमार्ग उसकी भूमि से होकर गुजरने का दावा कर उस पर खोखा लगा दिया, जिसे हटाने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। मामले कोई परिणाम नहीं निकले पर राजनकांत ने मार्च माह फिर सड़क पर खोखो लगा दिया। तब प्रशासनिक अधिकारियों ने निशानदेही करने का आश्वासन पर राजनकांत ने खोखा हटाया था। इसके बाद निशानदेही की गई, जिसमें राजमार्ग की आठ बिस्वा भूमि निजी पाई गई।
लोक निर्माण विभाग बिलासपुर के अधिशासी अभियंता मनोहर शर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग की ओर से बनाई गई निशानदेही की रिपोर्ट को स्टडी किया जाएगा। इसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।