हिमाचल प्रदेश की बड़ी सीमेंट कंपनी एसीसी और अंबुजा में अचानक तालाबंदी हो जाने से प्रदेश भर में प्लास्टिक कचरे के ढेर लग गए हैं। मंडी जिला के जोगिंद्रनगर में 20 क्विंटल से अधिक प्लास्टिक कचरे का निष्पादन नहीं हो पाया है। ग्रामीण क्षेत्र में भी पंचायत प्रतिनिधियों के लिए प्लास्टिक कचरा गले की फांस बन गया है। पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या बन चुका प्लास्टिक कचरा बरमाणा स्थित सीमेंट कंपनियों में आसानी से निष्पादित हो जाता था। इसके लिए प्रदेश सरकार के साथ नगर निकायों, निगमों और पंचायतों से प्लास्टिक को 75 रुपये प्रति किलो खरीदकर इसके निष्पादन के लिए सीमेंट कंपनियों के हवाले कर दिया जाता था।
बीते एक माह से मंडी जिले समेत विभिन्न नगर निकायों और पंचायतों में प्लास्टिक कचरे के निष्पादन को लेकर अब बड़ी समस्या पैदा हो गई है। जोगिंद्रनगर में ही करीब एक क्विंटल प्लास्टिक कचरा एकत्रित हो जाता है। नगर परिषद के पास रोजाना 50 किलो से अधिक प्लास्टिक कचरा कूडे़ के ढेरों में मिल रहा है जिसका निष्पादन बीते एक माह से न होने से नगर परिषद की डपिंग साइट में प्लास्टिक कचरे के बड़े ढेर लग गए हैं। नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता शशि भूषण ने बताया कि 20 क्विंटल से अधिक प्लास्टिक कचरा शेड में भरा पड़ा है। सफाई पर्यवेक्षक रविकांत, निरीक्षक मनोज ने बताया कि सीमेंट कंपनियों में चल रहे विवाद के कारण प्लास्टिक कचरा नहीं भेजा जा रहा है।
कुछ जगहों पर प्लास्टिक कचरे को आग के हवाले कर कार्बन मॉनोऑक्साईड, अमोनिया जैसी जहरीली गैसें पर्यावरण को प्रदूषित कर रही हैं। टांडा मेडिकल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की पढ़ा कर रही डॉ. आंचल ने बताया कि प्लास्टिक कचरे का सही निष्पादन न होने से कैंसर रोग की संभावनाएं रहती हैं। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी चमन लाल ने बताया कि सीमेंट कंपनियों में तालाबंदी के चलते प्लास्टिक कचरे के ढेर लग गए हैं। निदेशक शहरी विकास विभाग से समस्या के समाधान को लेकर पत्राचार किया जा रहा है।