सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए केलांग के प्यूकर गांव में बिटिया के जन्मदिन पर गोची उत्सव मनाकर ‘बेटी है अनमोल’ के नारे को बुलंद किया गया। बेटी के जन्म पर आयोजित इस पारंपरिक उत्सव के सैकड़ों लोग गवाह बने। इससे पहले यहां बेटे के जन्म पर ही गोची उत्सव मनाने का रिवाज था। घाटी के प्यूकर गांव में बच्ची सोनम डोलमा के नाम पर पारंपरिक रीति-रिवाज से गोची उत्सव धूमधाम से मनाया गया।
गांव के मुख्य देवता तंगजर की पूजा-अर्चना के साथ बेटी के बेहतर भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम में गांव के युवा पारंपरिक वेशभूषा में सजकर नगाड़ों की थाप पर जमकर नाचे। बर्फ की चादर में लिपटी घाटी की वादियां देवता के जयकारों से गूंज उठीं। बेटी के जन्म पर गोची उत्सव को लेकर परिवार समेत पूरे गांव वालों में गजब का उत्साह देखा गया।
बच्ची के चाचा तोबदन ने बताया कि गोची उत्सव में पूरे गांव को परिवार की तरफ से धाम परोसी गई। कई पारंपरिक व्यंजन और पकवान तैयार किए गए। सुबह से ही बच्ची के घर में मेहमानों का आना शुरू हो गया। पहला अन्न का दाना देवता तंगजर के नाम अर्पित किया गया।
पूजा-अर्चना पूरी करने के बाद ढोल नगाड़ों की थाप और पुराने गीतों से नन्हीं सोनम डोलमा को शुभकामनाएं दी गईं। बच्ची के पिता वंग्याल ने बताया इस मौके पर पूरे गांव ने सोनम डोलमा के बेहतर भविष्य के लिए दुआ मांगी।