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कलयुग को स्वर्ण में स्थान देना सबसे बड़ी भूल : भारद्वाज

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शिमला। गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को राजा परीक्षित और कलयुग के प्रसंग का वर्णन किया गया। शाम 3:30 बजे से शुरू हुई कथा में कथावाचक पंडित सुरेश भारद्वाज ने बताया कि जब राजा परीक्षित ने कलयुग को अपने राज्य से बाहर जाने का आदेश दिया तब कलयुग ने निवेदन किया कि द्वापर युग समाप्त हो चुका है और नियति के अनुसार उसे पृथ्वी पर रहने का अधिकार है। इस पर राजा परीक्षित ने विचार-विमर्श के बाद कलयुग को जुआ, मद्यपान, परस्त्रीगमन और हिंसा जैसे चार स्थानों में रहने की अनुमति दी। कलयुग ने कूटनीति का सहारा लेते हुए कहा कि धर्मात्मा राजा के राज्य में ऐसे स्थान मिलना कठिन है, इसलिए उसे कोई अन्य स्थान भी प्रदान किया जाए। इस आग्रह पर राजा परीक्षित ने कलयुग को स्वर्ण में निवास करने की अनुमति दे दी जो उनकी सबसे बड़ी भूल सिद्ध हुई। कलयुग ने इस अवसर का लाभ उठाकर राजा के स्वर्ण मुकुट में प्रवेश कर लिया और यहीं से उसके प्रभाव का विस्तार शुरू हुआ। सनातन धर्म सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि 5 जून तक चलने वाली यह कथा प्रतिदिन शाम 3:30 बजे से 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। संवाद
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