बोले, लोकतांत्रिक गरिमा बनाए रखने के लिए यह जरूरी अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडीज) शिमला में बुधवार को दसवें रबींद्रनाथ टैगोर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे ने कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि प्रभावी लोकतांत्रिक शासन के लिए राजनीतिक दलों में मूलभूत सुधार की आवश्यकता है। सहस्रबुद्धे ने कहा कि लोकतंत्र के प्रति जन-विश्वास को बहाल करने और लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखने के लिए यह आवश्यक हैं। कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता राजनीतिक दलों की मजबूती, पारदर्शिता और सुदृढ़ वैचारिक आधार पर निर्भर करती है। उन्होंने मौजूदा समय में राजनीतिक दलों की संगठनात्मक कमियों को उजागर किया। कहा कि राजनीतिक दलों के आंतरिक लोकतंत्र की मजबूती, दल बदल की प्रवृत्ति पर नियंत्रण और प्रभावी चुनाव सुधारों के माध्यम से लोकतंत्र की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रयास होने चाहिए। संस्थान के निदेशक प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी ने सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। संस्थान की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया। संस्थान के सचिव मेहरचंद नेगी ने कार्यक्रम की सफलता पर अतिथियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्थान के पुस्तकालय सभागार में आयोजित इस व्याख्यान में संस्थान के विद्वानों, शोधार्थियों, प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।